कर्नाटक की राजनीति में बड़ा फेरबदल करते हुए कांग्रेस ने कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदल दिया है। 77 वर्षीय सिद्धारमैया की जगह अब 64 साल के डीके शिवकुमार राज्य की कमान संभालेंगे। माना जा रहा है कि यह फैसला 2023 में सरकार गठन के समय हुई ‘सीक्रेट डील’ के तहत लिया गया है। हालांकि, इस बदलाव ने कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं।
दरअसल, मई 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 224 में से 135 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला था। जीत के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ने मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोका था। कई दौर की बैठकों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर समझौता हुआ है।
20 मई 2026 को सिद्धारमैया के तीन साल पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई। कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली में बैठक कर सत्ता परिवर्तन का फॉर्मूला तय किया। इसके बाद 28 मई को सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया और डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन गई।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए युवा और लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले चेहरे को आगे लाना चाहता है। वहीं डीके शिवकुमार को पार्टी का संकटमोचक और मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है। वोक्कालिगा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ भी कांग्रेस के लिए अहम मानी जा रही है।
हालांकि इस फैसले से कांग्रेस को नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है। सिद्धारमैया को कर्नाटक में ‘अहिंदा’ यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा और दलित वर्ग का बड़ा नेता माना जाता है। यह वर्ग राज्य की करीब 62% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। बीजेपी अब इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस पर ओबीसी नेतृत्व की अनदेखी का आरोप लगा सकती है।
इसके अलावा डीके शिवकुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। बीजेपी पहले ही उन्हें ‘फंड मैनेजर’ और विवादित छवि वाला नेता बताकर निशाना साध रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह वोक्कालिगा और अहिंदा दोनों वोटबैंक को साथ बनाए रखे। अगर पार्टी इस संतुलन को साधने में सफल रही तो यह बदलाव मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है, लेकिन जरा सी चूक बीजेपी और जेडीएस को बड़ा राजनीतिक फायदा पहुंचा सकती है।
