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    November 19, 2025

    जमीन सत्यापन प्रक्रिया में तेजी, सरकार ने तय की नई समयसीमा; बिचौलियों पर शिकंजा

    उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति के भौतिक सत्यापन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब रजिस्ट्री होने के तीन महीने के भीतर ही स्थलीय सत्यापन अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। अभी तक यह अवधि चार वर्ष तक थी, जिसके कारण सत्यापन में देरी, अवैध वसूली और उत्पीड़न की शिकायतें लगातार सामने आती थीं। स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने नियम में संशोधन करते हुए इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी उपनिबंधकों को निर्देश जारी किए हैं।

    चार साल वाली लंबी अवधि के कारण अक्सर ऐसी स्थितियां बन जाती थीं कि रजिस्ट्री के समय भूमि खाली दिखती थी, लेकिन कई साल बाद निरीक्षण के दौरान वहां निर्माण पाया जाता था। ऐसे मामलों में जांच अधिकारी रजिस्ट्री की स्थिति का हवाला देकर स्टांप चोरी का वाद दर्ज कर देते थे। इस नियम के चलते आम लोगों के उत्पीड़न और बिचौलियों द्वारा वसूली की शिकायतें बढ़ रही थीं। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह परिवर्तन किया है।

    स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि स्थलीय निरीक्षण को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए समयसीमा घटाई गई है। उन्होंने बताया कि लंबे अंतराल में संपत्ति की प्रकृति बदल जाना स्वाभाविक है, लेकिन इसे आधार बनाकर कार्रवाई करना आम नागरिकों के हित में नहीं था। नए नियम के बाद सत्यापन समय पर होगा और अनावश्यक विवादों में कमी आएगी।

    सरकार ने अधिकारियों को हर महीने ठोस लक्ष्य भी दिए हैं। जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और सहायक महानिरीक्षक निबंधन को क्रमशः 5, 25 और 50 लेखपत्रों का सत्यापन भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं उपनिबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे हर महीने स्वयं तय संख्या में रजिस्ट्री का निरीक्षण करेंगे और यह काम किसी अधीनस्थ को सौंपा नहीं जाएगा। बाजार मूल्य और स्टांप शुल्क से जुड़े दस्तावेजों का विशेष रूप से निरीक्षण कराया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि रजिस्ट्री के केवल तीन महीने के भीतर निरीक्षण की व्यवस्था से न्यायालयों में चल रहे स्टांप चोरी और संपत्ति विवादों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी, और जनता को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।

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