कैंसर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर दुनियाभर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। साल 2020 में इस बीमारी से लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत हुई, यानी हर छह मौतों में से एक मौत कैंसर के कारण हुई। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं।
कैंसर के बढ़ते मामलों और इससे होने वाली मौतों को देखते हुए हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है, ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके और समय पर जांच व इलाज को बढ़ावा मिले।
इसी बीच दिल्ली से सामने आई एक सरकारी रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में राजधानी में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 साल से कम उम्र के लोगों में हुई है। यह आंकड़ा युवाओं में बढ़ते कैंसर के खतरे की ओर इशारा करता है।
45 साल से कम उम्र में बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से हुई कुल मौतों में से लगभग 33 प्रतिशत मौतें 44 साल से कम उम्र के लोगों की थीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे बीमारी का देर से पता चलना, स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन, प्रदूषण और मानसिक तनाव जैसे कारण जिम्मेदार हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में कैंसर से 1.1 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
- साल 2005 में कैंसर से करीब 2,000 मौतें हुई थीं
- 2011 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 10,000 हो गया
- 2024 में कैंसर से मौतों की संख्या 7,400 तक पहुंच गई
2011 के आंकड़ों में मरने वालों में 41 प्रतिशत से ज्यादा लोग 45–64 साल की उम्र के थे, जबकि लगभग 8 प्रतिशत 14 साल से कम उम्र के बच्चे और 5.8 प्रतिशत 15–24 साल के युवा शामिल थे।
सालाना 7% की दर से बढ़ रही मौतें
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतें सालाना औसतन 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो राजधानी की जनसंख्या वृद्धि दर से करीब तीन गुना अधिक है। 90 प्रतिशत से ज्यादा मौतें अस्पतालों में हुई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि समय के साथ कैंसर के रिपोर्ट होने और इलाज की दर बढ़ी है।
कौन सा कैंसर सबसे ज्यादा खतरनाक?
डेटा विश्लेषण के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले ज्यादा हैं।
- महिलाओं में ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर मौत के प्रमुख कारण हैं
- पुरुषों में प्रोस्टेट, फेफड़े और सांस की नली का कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुआ
- मुंह और गले के कैंसर से होने वाली मौतें तंबाकू के बढ़ते खतरे को दर्शाती हैं
25–44 साल की महिलाओं में कैंसर से होने वाली ज्यादातर मौतें ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के कारण दर्ज की गईं।
देर से पहचान बन रही बड़ी वजह
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मौतों का सबसे बड़ा कारण बीमारी का देर से पता चलना है। शुरुआती लक्षणों को अक्सर कम उम्र के कारण नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
डॉक्टरों का जोर है कि जल्दी स्क्रीनिंग, जागरूकता और जीवनशैली में सुधार के जरिए कैंसर से होने वाली समय से पहले मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
