वजन घटाने को अक्सर इच्छाशक्ति, डाइट कंट्रोल और वर्कआउट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नेशनल ज्योग्राफिक सहित कई वैश्विक शोध बताते हैं कि वजन कम करने की सबसे बड़ी बाधा इंसान की आदत नहीं बल्कि शरीर का जैविक प्रतिरोध (बायलॉजिकल रेज़िस्टेंस) है। वैज्ञानिकों के अनुसार जैसे ही शरीर का वजन कम होने लगता है, शरीर इसे संकट की स्थिति मानता है। इसके परिणामस्वरूप मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, भूख बढ़ जाती है और शरीर अधिक वसा जमा करने लगता है।
शरीर क्यों बढ़ा देता है भूख?
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानव शरीर एक निश्चित वजन सीमा—सेट-पॉइंट—को बनाए रखने की कोशिश करता है। शरीर भोजन को कितनी तेजी से ऊर्जा में बदलता और खर्च करता है, इसे मेटाबॉलिज्म कहा जाता है। जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, उनमें कैलोरी खर्च अधिक होती है और मोटापा कम होता है। वहीं धीमे मेटाबॉलिज्म वाले लोग कम कैलोरी भी आसानी से जमा होने देते हैं और वजन बढ़ता रहता है। इसलिए वजन नियंत्रण के लिए मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है।
क्या वजन घटाना फिर भी संभव है?
नवीनतम शोध और दुनिया भर के उदाहरण साबित करते हैं कि शरीर के इस जैविक प्रतिरोध को हराना संभव है। संतुलित भोजन, नियमित योग-व्यायाम, तनाव-प्रबंधन, पर्याप्त नींद और निरंतर अनुशासन से वजन को घटाकर स्थिर रखा जा सकता है।
तोंद घटाने के विज्ञान-आधारित उपाय
पेट की चर्बी यानी विसरल फैट हार्मोनल असंतुलन—विशेषकर कॉर्टिसोल और इंसुलिन—से जुड़ी होती है। इसे कम करने के सबसे प्रभावी विज्ञान-आधारित उपाय:
- परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और शक्कर कम करना
- प्रोटीन, फाइबर और ओमेगा-3 आधारित आहार अपनाना
- रोजाना 45–60 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज
- नियमित कोर स्ट्रेंथ और हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग
- तनाव-नियंत्रण, पर्याप्त नींद और प्रतिदिन प्राणायाम
वजन घटाने के विज्ञान आधारित नियम
1. कैलोरी घाटा बढ़ाएं
जितनी कैलोरी आप लेते हैं, उससे अधिक खर्च करना—वजन घटाने का मूल सिद्धांत है।
2. शक्कर और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट कम करें
मैदा, ब्रेड, जूस, मिठाइयां और पैकेज्ड स्नैक्स वजन बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं।
3. प्रोटीन और फाइबर शामिल करें
प्रोटीन मांसपेशियां बनाए रखता है, फाइबर पेट भरा रखता है—दोनों भूख को नियंत्रित करते हैं।
4. खाने का समय तय रखें
अनियमित भोजन से वसा जमा होती है। रोज लगभग एक ही समय पर खाना पाचन और हार्मोन संतुलन में मदद करता है।
5. रोज 45–60 मिनट व्यायाम आवश्यक
तेज चलना, दौड़ना, साइक्लिंग जैसे एरोबिक एक्सरसाइज के साथ सप्ताह में 3–4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद प्रभावी है।
