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    February 01, 2026

    सीपीआर देने के बाद भी नहीं बच पाई धावक की जान, उठे कई सवाल

    इंदौर में रविवार सुबह आयोजित एक मैराथन के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया। कोलकाता से आए धावक आर्यन तोड़ी की फिनिश लाइन से महज 100 मीटर पहले तबीयत अचानक बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द के बाद वे जमीन पर बैठ गए और कुछ ही देर में गिर पड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आर्यन के पीछे ही दौड़ रहे डॉक्टर भरत रावत ने मानवता दिखाते हुए अपनी रेस छोड़ दी और तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। करीब 10 मिनट तक लगातार सीपीआर देने के बाद आर्यन को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में इसे सडन कार्डियक अरेस्ट का मामला माना जा रहा है। हालांकि, मौत की सटीक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।

    इस मामले पर ओडिशा के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा का कहना है कि यदि दिल की धमनियों में मैसिव ब्लॉकेज हो या हृदय की मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच चुका हो, तो सीपीआर के बावजूद रक्त प्रवाह बहाल नहीं हो पाता। इसके अलावा, मैराथन जैसे अत्यधिक शारीरिक श्रम के दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स का गंभीर असंतुलन भी जानलेवा साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मैराथन के अंतिम चरण में धावक अक्सर गति बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जिससे दिल पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ता है। अगर किसी को पहले से कोई अज्ञात हृदय रोग हो, तो यह स्थिति घातक बन सकती है।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि हाई-इंटेंसिटी खेलों में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। ईसीजी, टीएमटी और जरूरत पड़ने पर सीटी एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट छिपी हुई हृदय संबंधी समस्याओं को समय रहते पकड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिटनेस का उद्देश्य जीवन को सुरक्षित और बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उसे जोखिम में डालना।

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