मौजूदा समय में शरीर को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अक्सर लोग शारीरिक सेहत पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन न सिर्फ जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, बल्कि शारीरिक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह की सेहत को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
अगर आपको या आपके बच्चों को लोगों से मिलने-जुलने, बातचीत करने या भीड़ में जाने से डर लगता है और इसकी वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो सावधान हो जाइए। यह सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (SAD) का संकेत हो सकता है।
क्या है सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर?
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर को सामाजिक भय भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को लोगों के सामने बोलने, मिलने या किसी सामाजिक स्थिति का सामना करने में अत्यधिक डर और घबराहट महसूस होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह दुनिया में पाए जाने वाले सबसे आम एंग्जायटी डिसऑर्डर्स में से एक है।
यह समस्या आमतौर पर किशोरावस्था या युवावस्था में शुरू होती है। समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह पढ़ाई, करियर, रिश्तों और आत्मविश्वास पर गहरा असर डाल सकती है।
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण
- कुछ मामलों में यह समस्या आनुवांशिक हो सकती है
- दिमाग का हिस्सा अमिगडाला जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाए तो डर की प्रतिक्रिया बढ़ सकती है
- बचपन के तनावपूर्ण या दर्दनाक अनुभव, जैसे सार्वजनिक अपमान या दुर्व्यवहार
- लंबे समय तक स्ट्रेस और नकारात्मक सामाजिक अनुभव
कैसे पहचानें कि आपको SAD है?
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर के कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं—
- लोगों के सामने नकारात्मक रूप से आंके जाने का डर
- अजनबियों या रिश्तेदारों से बातचीत करने में घबराहट
- यह डर कि लोग आपकी घबराहट नोटिस कर लेंगे
- शारीरिक लक्षण जैसे पसीना आना, कांपना, शर्माना, आवाज कांपना
- शर्मिंदगी के डर से बातचीत या सामाजिक गतिविधियों से बचना
- उन स्थितियों से दूरी बनाना जहां लोगों का ध्यान आप पर हो सकता है
समय पर इलाज है जरूरी
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज थेरेपी और दवाओं से संभव है।
- कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT)
- काउंसलिंग
- जरूरत पड़ने पर दवाएं
समय रहते इलाज न होने पर यह समस्या डिप्रेशन और नशे की लत का कारण भी बन सकती है। इसलिए लक्षण नजर आते ही विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
