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    November 12, 2025

    बार-बार ध्यान भटकना हो सकता है पॉपकॉर्न सिंड्रोम का लक्षण, जानें इसके कारण

    आज के डिजिटल युग में लोगों के लिए किसी एक काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना चुनौती बनता जा रहा है। अगर आपका दिमाग भी लगातार एक विचार से दूसरे पर कूदता रहता है, तो यह ‘पॉपकॉर्न सिंड्रोम’ का संकेत हो सकता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक स्थिति है जो हमारी डिजिटल आदतों से जुड़ी है।

    क्या है पॉपकॉर्न सिंड्रोम?

    जैसे पॉपकॉर्न तेजी से उछलता है, वैसे ही हमारा दिमाग लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया अपडेट्स और मल्टीटास्किंग के कारण सक्रिय रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, टेक्नोलॉजी पर निर्भरता ने हमारे मस्तिष्क को इतनी तेजी से सूचना प्रोसेस करने का आदी बना दिया है कि वह शांत और स्थिर कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाता।

    डिजिटल ओवरलोड का असर

    लगातार मोबाइल, ईमेल और सोशल मीडिया अपडेट्स चेक करने की आदत दिमाग में डोपामाइन की छोटी-छोटी खुराकें देती है, जिससे हमारा मस्तिष्क उत्तेजित रहता है। यही वजह है कि ध्यान केंद्रित करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है।

    प्रोडक्टिविटी और नींद पर प्रभाव

    इस सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति एक साथ कई काम शुरू करता है लेकिन कोई पूरा नहीं कर पाता। नतीजा — काम की गुणवत्ता घट जाती है और तनाव बढ़ता है। सोने से पहले फोन देखने की आदत नींद की गुणवत्ता को भी खराब करती है, जिससे अगले दिन फोकस और घट जाता है।

    कैसे करें नियंत्रण

    • माइंडफुलनेस मेडिटेशन करें: रोजाना 10 मिनट ध्यान लगाएं, दिमाग शांत रहेगा।
    • डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं: हफ्ते में एक दिन स्क्रीन से दूरी बनाएं।
    • नोटिफिकेशन बंद करें: काम के दौरान ध्यान भटकने से बचें।
    • ब्रेन एक्सरसाइज करें: किताबें पढ़ें या पज़ल हल करें ताकि एकाग्रता बढ़े।

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