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    February 07, 2026

    बच्चों के लिए आउटडोर गेम्स क्यों हैं जरूरी? जानें मेंटल हेल्थ पर खेलकूद का असर

    गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों से जुड़ी दुखद घटना ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल गेमिंग की लत और उसके मानसिक प्रभावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका बच्चों को आउटडोर गेम्स की ओर प्रेरित करना है।

    जब बच्चे खुले मैदान में खेलते हैं तो उनका शारीरिक ही नहीं, मानसिक विकास भी बेहतर होता है। खेलकूद के दौरान शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ का स्राव होता है, जो तनाव, अकेलापन और चिंता को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही सामाजिक मेलजोल बढ़ने से बच्चों के मन की कुंठाएं भी दूर होती हैं।

    आउटडोर गेम्स बच्चों को टीम वर्क, हार-जीत को स्वीकार करना और वास्तविक सामाजिक संवाद जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल सिखाते हैं। इसके विपरीत, अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों को अलगाव, चिड़चिड़ेपन और मानसिक तनाव की ओर धकेल सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि से एकाग्रता, याददाश्त और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है, जबकि स्क्रीन टाइम बढ़ने से स्लीप साइकिल प्रभावित होती है और डिप्रेशन जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं।

    माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें, उन्हें खेल के मैदान से जोड़ें और स्वयं भी उनके साथ समय बिताएं। डिजिटल संतुलन और सक्रिय जीवनशैली ही बच्चों के स्वस्थ शरीर और मजबूत मन की सबसे बड़ी कुंजी मानी जा रही है।

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