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    May 29, 2026

    भारतीय बल्लेबाजों ने बदली IPL की तस्वीर, विदेशी गेंदबाजों का अब भी कायम है दबदबा

    IPL 2026 में बदली तस्वीर, बल्लेबाजी में भारतीयों का दबदबा; गेंदबाजी में विदेशी अब भी आगे

    एक समय IPL की पहचान क्रिस गेल, एबी डिविलियर्स, कीरोन पोलार्ड और डेविड वॉर्नर जैसे विदेशी पावर-हिटर्स से होती थी। लेकिन IPL 2026 में तस्वीर बदलती नजर आई। इस सीजन भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए विदेशी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया, जबकि गेंदबाजी में विदेशी खिलाड़ी अब भी ज्यादा प्रभावी साबित हुए।

    भारतीय बल्लेबाजों ने दिखाया दम

    IPL 2026 में भारतीय बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 157.01 रहा, जो पिछले सीजन के 152 से काफी बेहतर है। वहीं विदेशी बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट 155.37 रहा। इससे साफ है कि अब भारतीय खिलाड़ी सिर्फ पारी संभालने की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मैच का टेम्पो भी तय कर रहे हैं।

    गेंदबाजी में विदेशी रहे असरदार

    गेंदबाजी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। भारतीय गेंदबाजों ने इस सीजन 506 विकेट लिए, जबकि पिछले सीजन यह आंकड़ा 533 था। उनकी इकोनॉमी भी 9.42 से बढ़कर 9.79 हो गई। विदेशी गेंदबाज भी पिछले साल की तुलना में महंगे साबित हुए, लेकिन वे भारतीय गेंदबाजों से अधिक किफायती और प्रभावी रहे।

    प्लेयर ऑफ द मैच में भारतीयों की बढ़त, लेकिन संख्या घटी

    इस सीजन 53 बार प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड दिए गए, जिनमें 31 भारतीय और 22 विदेशी खिलाड़ी शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और संजू सैमसन को सबसे ज्यादा तीन-तीन बार यह सम्मान मिला। हालांकि पिछले सीजन 35 भारतीय खिलाड़ियों को यह अवॉर्ड मिला था, जो इस बार घटकर 31 रह गया।

    बल्लेबाजी के रिकॉर्ड हुए बेहतर

    IPL 2026 में बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट और औसत दोनों बढ़े हैं। चौकों, छक्कों, शतकों और अर्धशतकों की संख्या में भी पिछले सीजन के मुकाबले इजाफा दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि बल्लेबाज अब तेजी से रन बनाने के साथ-साथ बड़ी पारियां भी खेल रहे हैं।

    गेंदबाजों पर बढ़ा दबाव

    इस सीजन कुल 813 विकेट गिरे, जबकि 2025 में यह संख्या 829 थी। गेंदबाजों का औसत 31.42 से बढ़कर 32.45 पहुंच गया। साथ ही इकोनॉमी रेट 9.50 से बढ़कर 9.76 हो गई, जो IPL इतिहास की सबसे महंगी इकोनॉमी में शामिल है। इससे साफ है कि बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे के बीच गेंदबाजों के लिए चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है।

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