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    May 30, 2026

    सिर्फ पेट भरने वाली फसल नहीं रहा आलू, रिसर्च और तकनीक से बदल रही तस्वीर

    आलू बना विज्ञान और शोध की नई प्रयोगशाला, तेजी से बढ़ रही उन्नत किस्मों की खेती

    आलू अब केवल पेट भरने वाली फसल नहीं रहा, बल्कि विज्ञान और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। बदलती खाद्य जरूरतों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को देखते हुए वैज्ञानिक ऐसी नई किस्में विकसित कर रहे हैं, जो बेहतर पोषण के साथ-साथ प्रोसेसिंग उद्योग की मांगों को भी पूरा कर सकें।

    संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार आलू दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में शामिल है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पोषण और गरीबी उन्मूलन में इसकी भूमिका को रेखांकित करने के लिए हर साल 30 मई को अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस मनाया जाता है।

    इसी दिशा में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला और देहरादून द्वारा विकसित कुफरी नीलकंठ, कुफरी सूर्या और चिप्सोना-1 जैसी उन्नत किस्में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। उत्तर प्रदेश की आलू बेल्ट में इन किस्मों का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई किस्में बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त गुणवत्ता प्रदान कर रही हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ खाद्य उद्योग को भी बेहतर कच्चा माल मिल रहा है।

    कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले समय में शोध आधारित उन्नत किस्में आलू उत्पादन को नई दिशा देंगी और खेती को अधिक लाभकारी बनाएंगी।

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