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    May 25, 2026

    शॉर्ट्स पहनने पर हुआ विरोध, संघर्ष के दम पर फुटबॉल मैदान तक पहुंचीं लड़कियां

    राजस्थान के बीकानेर जिले का छोटा सा गांव ढींगसरी इन दिनों अपनी बेटियों की वजह से देशभर में पहचान बना रहा है। कभी बकरियां चराने और घर-खेत के कामों तक सीमित रहने वाली गांव की बच्चियां आज फुटबॉल मैदान में देश का नाम रोशन कर रही हैं।

    वर्ल्ड फुटबॉल डे के मौके पर सामने आई इस प्रेरणादायक कहानी में गांव की बेटी मुन्नी भांभू सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी हैं। साधारण परिवार से आने वाली मुन्नी आज भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की मुख्य गोलकीपर हैं और चीन में आयोजित एशियन कप क्वालिफायर में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वे 27 साल बाद राजस्थान से भारतीय महिला फुटबॉल टीम में जगह बनाने वाली पहली खिलाड़ी बनी हैं।

    इस बदलाव के पीछे फुटबॉल कोच विक्रम सिंह राजवी का बड़ा योगदान रहा। साल 2020 में उन्होंने गांव के लड़कों को ट्रेनिंग देना शुरू किया, लेकिन रुचि नहीं मिलने पर लड़कियों को मैदान में उतारने का फैसला किया। शुरुआत में गांव वालों ने बेटियों को खेलने भेजने से इनकार कर दिया। यहां तक कि लड़कियों के शॉर्ट्स पहनकर खेलने का भी विरोध हुआ। इसके बाद विक्रम सिंह ने परिवारों को समझाया और अपनी पत्नी समेत घर की महिलाओं को भी मैदान में बैठाया, तब जाकर लोगों का भरोसा बढ़ा।

    गांव की बेटियों के सपनों को उड़ान देने के लिए विक्रम सिंह ने अपनी 15 बीघा पुश्तैनी जमीन तक बेच दी। उस पैसे से गांव में फुटबॉल मैदान और सुविधाएं तैयार करवाईं। आज ढींगसरी में करीब 100 लड़कियां हॉस्टल में रहकर फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रही हैं।

    साल 2024 में राजस्थान की लड़कियों ने 60 साल बाद नेशनल फुटबॉल ट्रॉफी जीती, जिसमें ढींगसरी गांव की 12 बेटियां शामिल थीं। अब यह गांव बेटियों की खेल प्रतिभा और बदलती सामाजिक सोच की मिसाल बन चुका है।

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