आंखों पर पट्टी बांधकर रंग और कार्ड पहचान रहे बच्चे, योग-मेडिटेशन से संभव होने का दावा
चित्तौड़गढ़ में आयोजित आर्यवीर दल के 10 दिवसीय आत्मरक्षा एवं चरित्र निर्माण शिविर में बच्चों के एक अनोखे प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शिविर में शामिल बच्चे आंखों पर पट्टी बंधी होने के बावजूद रंग पहचानने, कार्ड पर लिखे शब्द बताने और हाथों के मूवमेंट समझने का दावा करते नजर आए। शिविर के प्रशिक्षकों का कहना है कि यह सब योग, मेडिटेशन और विशेष मानसिक अभ्यासों के जरिए संभव हो पाता है।
शिविर 19 से 28 मई तक श्री गुरुकुल, चित्तौड़गढ़ में आयोजित किया गया था, जिसमें राजस्थान के 22 जिलों से करीब 300 बच्चों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षक भारद्वाज रतन के अनुसार यह कोई चमत्कार या जादू नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास और अनुभव का परिणाम है। बच्चों को आंखें बंद करके रंग, आकृतियां और अन्य गतिविधियों को महसूस करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षकों का दावा है कि बच्चे किसी वस्तु को हाथ में लेकर उसकी बनावट, गंध और अन्य संवेदनाओं के आधार पर पहचानने का प्रयास करते हैं। नियमित योग, ब्रेन एक्सरसाइज और मेडिटेशन के माध्यम से उनकी एकाग्रता और संवेदनशीलता बढ़ाई जाती है, जिससे वे रंगों और गतिविधियों को बेहतर तरीके से महसूस कर पाते हैं।
सार्वदेशिक आर्यवीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नंद किशोर ने बताया कि शिविर में योग, ध्यान, हवन, जूडो-कराटे, लाठी और अन्य शारीरिक गतिविधियों के साथ ‘तृतीय नेत्र विकास’ (थर्ड आई प्रैक्टिस) पर भी विशेष जोर दिया जाता है। बच्चों को पहले मानसिक रूप से शांत और एकाग्र बनाया जाता है, फिर उन्हें विभिन्न संवेदनाओं को पहचानने का अभ्यास कराया जाता है।
शिविर में बच्चों की आंखों पर रुई और पट्टी बांधकर अलग-अलग रंगों के ब्लॉक, कार्ड और ड्राइंग शीट दी गईं। प्रशिक्षकों के अनुसार कई बच्चों ने बिना देखे रंगों की पहचान करने, कार्ड पर लिखे शब्द बताने और आकृतियों में सही रंग भरने जैसी गतिविधियां सफलतापूर्वक कीं।
शिविर में शामिल बच्चों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना है कि योग और ध्यान के माध्यम से उन्हें नई चीजें सीखने का अवसर मिला है और वे आगे भी इस प्रशिक्षण को जारी रखना चाहते हैं।
सार्वदेशिक आर्यवीर दल की स्थापना वर्ष 1929 में हुई थी। संगठन का उद्देश्य संस्कृति की रक्षा, शक्ति का संचय और सेवा कार्यों को बढ़ावा देना है। शिविर के बाद 1 से 15 जून तक गुरुकुल कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का शिविर आयोजित किया जाएगा।
