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    May 31, 2026

    कैमरे पर कबूलनामा: हजार रुपए में खरगोश, शिकारियों का नेटवर्क बेनकाब

    ₹1000 के लिए हो रहा जंगली खरगोश का शिकार, शिकारियों ने कैमरे पर कबूला सच

    राजस्थान में संरक्षित वन्यजीव जंगली खरगोश का अवैध शिकार धड़ल्ले से जारी है। जयपुर के आसपास के जंगलों में दैनिक भास्कर की सात दिन की पड़ताल में शिकारियों ने कैमरे पर खुलकर स्वीकार किया कि वे ऑर्डर मिलने पर खरगोश का शिकार करते हैं और उसकी होम डिलीवरी तक उपलब्ध कराते हैं।

    शिकारियों ने बताया कि एक दिन पहले ऑर्डर देने पर वे खरगोश का इंतजाम कर देते हैं। शिकार किए गए खरगोश को 1000 से 2000 रुपए तक में बेचा जाता है। उनका दावा है कि वे दिनभर में 3 से 4 खरगोशों का शिकार कर लेते हैं और मांग के अनुसार सप्लाई भी करते हैं।

    पड़ताल के दौरान जयपुर के जमवारामगढ़ क्षेत्र में रिपोर्टर की मुलाकात ऐसे शिकारियों से हुई, जिनके पास दो मृत खरगोश मौजूद थे। शिकारियों ने बताया कि वे गुलेल और जाल की मदद से खरगोशों का शिकार करते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई होटल संचालक और ग्राहक उनके संपर्क में रहते हैं।

    शिकारियों ने खरगोश के खून से अस्थमा जैसी बीमारियां ठीक होने का दावा भी किया, लेकिन एसएमएस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इसे पूरी तरह भ्रामक बताया। डॉक्टरों के अनुसार किसी भी जानवर का खून पीने से बीमारी ठीक नहीं हो सकती और ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय खरहा (Indian Hare) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इसके शिकार और पकड़ने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद अधिक कमाई और अंधविश्वासों के कारण शिकार का यह अवैध कारोबार जारी है।

    वन विभाग ने मामले की जानकारी मिलने पर जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है।

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