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    May 25, 2026

    कंज्यूमर कोर्ट ने LIC को लगाई फटकार, कहा- क्लेम के समय लोगों को उलझाते हैं

    झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने एलआईसी (LIC) को फटकार लगाते हुए एक विधवा महिला को बीमा क्लेम के लिए वर्षों तक भटकाने पर कड़ी टिप्पणी की है। आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने कहा कि किसान की मौत के बाद उसकी पत्नी को 9 साल 4 महीने तक न्याय के लिए दर-दर भटकाना उपभोक्ता संरक्षण कानून की आत्मा की हत्या करने जैसा है।

    आयोग ने LIC को मृतक किसान की पत्नी को 5 लाख 54 हजार 275 रुपए की बीमा राशि, 85 हजार रुपए पेनल्टी और 1.5 लाख रुपए विशेष क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। साथ ही फैसले की प्रति मुख्य सचिव को भेजते हुए किसानों और मजदूरों से जुड़े मामलों में सख्त गाइडलाइन बनाने की सिफारिश की गई है।

    मामला झुंझुनूं की चुड़ैला ग्राम सेवा सहकारी समिति से जुड़ा है, जहां 395 किसानों ने सहकार जीवन सुरक्षा योजना के तहत बीमा करवाया था। चुड़ैला निवासी श्योराम ने अगस्त 2012 में पॉलिसी ली थी और हर महीने 160 रुपए प्रीमियम जमा करते थे। फरवरी 2013 में उनकी मौत के बाद पत्नी सजना देवी ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन एलआईसी लगातार टालमटोल करती रही। कंपनी ने श्योराम के नाम की एंट्री तक नहीं मिलने की बात कही। इसके बाद महिला ने 2016 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    फैसला सुनाते हुए आयोग ने कहा कि कंपनियां समय पर प्रीमियम तो ले लेती हैं, लेकिन क्लेम के समय उपभोक्ताओं को कानूनी पचड़ों और मानसिक प्रताड़ना में उलझा देती हैं। आयोग अध्यक्ष ने वकीलों से भी अपील की कि वे साल में कम से कम एक गरीब व्यक्ति का केस मुफ्त में लड़ें, ताकि जरूरतमंदों को त्वरित न्याय मिल सके।

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