नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेन्ट्रल जोन बेंच, भोपाल ने होटल मेरवाड़ा एस्टेट के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए होटल को क्लीन चिट दे दी है। जस्टिस शिवकुमार सिंह और जस्टिस सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने 18 सितंबर को सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि याचिका तथ्यों को छिपाकर और बदनीयती से प्रस्तुत की गई थी, जिसका उद्देश्य होटल संचालकों को अनावश्यक परेशान करना था।
यह याचिका भारतीय पब्लिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने दायर की थी। साहू ने आरोप लगाया था कि होटल का निर्माण बिना अनुमति के हुआ और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित क्षेत्र के दायरे में आता है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि होटल को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति नहीं मिली और नो-कन्स्ट्रक्शन जोन के बावजूद होटल और समारोह स्थल का संचालन हो रहा है।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने अजमेर कलेक्टर और स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की संयुक्त जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि होटल मेरवाड़ा एस्टेट का निर्माण अवैध नहीं है और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन नहीं हुआ। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि होटल संचालन के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं और परिसर में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
होटल की ओर से वकील लोकेन्द्र सिंह कच्छावा ने बताया कि निर्माण कार्य पूरी तरह वैध अनुमतियों के बाद किया गया, होटल नो-कन्स्ट्रक्शन जोन से बाहर है और स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से सभी मंजूरियां प्राप्त हैं। होटल में पर्यावरण संरक्षण के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और डी-कम्पोज मशीन स्थापित हैं और पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जाती है।
संबंधित विभागों ने भी एनजीटी को पुष्टि की कि होटल में कोई अवैध गतिविधि नहीं हो रही और संचालन नियमों के तहत ही किया जा रहा है। इन तथ्यों को देखते हुए एनजीटी ने बाबूलाल साहू की याचिका खारिज कर दी।
होटल मेरवाड़ा एस्टेट के चेयरमैन सतीश अरोड़ा ने कहा कि यह फैसला सत्य की जीत है। उन्होंने बताया कि होटल का संचालन हमेशा कानून और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया गया है और आधुनिक तकनीकों के जरिए पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अरोड़ा ने कहा कि यह निर्णय होटल से जुड़े सभी लोगों को राहत देगा। अरोड़ा ने कहा कि इस निर्णय से होटल से जुड़े सभी लोगों को बड़ी राहत मिली है और यह उन लोगों के लिए सबक है, जो झूठे आरोप लगाकर विकास कार्यों को बाधित करना चाहते हैं।
