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    September 13, 2025

    विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश का संदेश: न्यायपालिका-कार्यपालिका के बीच संतुलन अहम

    कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंधों में कूटनीति यानी राजनय जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने हमेशा दोनों पक्षों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। मुख्य न्यायाधीश 15 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

    शिवज्ञानम ने कहा कि कोलकाता ने उनके कार्यकाल को खास बना दिया। वे अक्टूबर 2021 में कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बने और मई 2023 में मुख्य न्यायाधीश के पद पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का मुखिया होना सिर्फ न्यायिक फैसले देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच संतुलन बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है।

    न्यायपालिका-कार्यपालिका संतुलन पर जोर
    मुख्य न्यायाधीश ने टाउन हॉल में आयोजित विदाई समारोह में कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच राजनय बेहद जरूरी है। न्यायपालिका को कभी भी कार्यपालिका का अधीनस्थ या अधीन महसूस नहीं करना चाहिए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों संस्थाओं का संबंध सहयोग और समझ पर आधारित होना चाहिए।

    ममता बनर्जी और राज्य सरकार की सराहना
    शिवज्ञानम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, न्यायिक सचिव सिद्धार्थ कंजीलाल और कानून मंत्री मलय घटक की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इनकी मदद से राज्य में न्यायिक ढांचे के विकास के कई काम पूरे किए जा सके। उन्होंने कहा कि करीब तीन साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने मुझे कभी खाली हाथ नहीं लौटाया।

    विदाई का दुर्लभ आयोजन
    कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए राज्य सरकार की ओर से विदाई समारोह बहुत कम हुआ है। इससे पहले 2012 में मुख्य न्यायाधीश जय नारायण पटेल को राज्य सरकार की ओर से औपचारिक विदाई दी गई थी। इस लिहाज से शिवज्ञानम के लिए आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा।

    टीएस शिवज्ञानम का जन्म 16 सितंबर 1963 को हुआ था। वे 1986 में तमिलनाडु बार काउंसिल में नामांकित हुए। मार्च 2009 में उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया और मार्च 2011 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। मई 2023 से उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला।

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