देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र के हरिपुर कालसी में जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विवाद तब सामने आया जब पाकिस्तान/पीओके से दो वीडियो वायरल हुए, जिनमें एक व्यक्ति ने खुद को जमीन का असली वारिस बताते हुए दावा किया कि कालसी की यह जमीन उसके दादा की थी और इमामबाड़ा मस्जिद को दान की गई थी। वीडियो में उसने कहा कि कुछ लोग इस संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
जमीन 2022 में जम्मू के गुलाम हैदर के नाम खरीदी गई थी
जिस जमीन को लेकर दावा किया जा रहा है, वह 2022 में जम्मू-कश्मीर निवासी गुलाम हैदर ने खरीदी थी। हैदर पहले जम्मू पुलिस में कार्यरत रहा है और उस पर आतंकियों की मदद के आरोप में कार्रवाई भी हो चुकी है।
स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने आरोप लगाया है कि हैदर ने जनजातीय क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज बनवाकर जमीन खरीदी।
CMO ने दिए जांच के आदेश
सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए देहरादून DM सविन बंसल को जांच के निर्देश जारी किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जनजातीय क्षेत्र में जहां बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता, वहां 10 बीघा जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति किसने दी?
वीडियो में क्या कहा गया?
पहले वायरल वीडियो में व्यक्ति ने अपना नाम अब्दुल्ला और दादा का नाम मोटा अली बताया।
उसका दावा है कि—
- जमीन उसके दादा की थी,
- वह इमामबाड़ा मस्जिद को दान की गई थी,
- अब दो पक्ष इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरे वीडियो में वह एक मौलवी के साथ नजर आता है, जहां दूसरा व्यक्ति स्थानीय प्रधानों का नाम लेते हुए जमीन अब्दुल्ला को लौटाने की मांग करता दिखता है।
जनजातीय क्षेत्र में जमीन कैसे खरीदी गई?
आरोप है कि गुलाम हैदर ने स्थानीय रिश्तेदारों की मदद से—
- परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराया,
- स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाया,
- फिर उसके आधार पर जमीन खरीद ली।
जौनसार-बावर जैसे अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र में SDM या DM की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्ति को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं होती।
शिकायतें और कोर्ट केस
स्थानीय निवासी संजय खान ने इस मामले में प्रशासन को कई शिकायती पत्र दिए और नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।
उनका आरोप है कि जमीन फर्जी दस्तावेजों पर बेची गई और प्रशासन ने इसे रोकने के बजाय नजरअंदाज किया।
स्वाभिमान मोर्चा ने मांग की है कि मामले में खुफिया एजेंसियों को भी जांच करनी चाहिए।
पछुवा देहरादून में जनसंख्या परिवर्तनों पर भी चर्चा
स्थानीय संगठनों का कहना है कि पछुवा देहरादून के कई इलाकों में पिछले वर्षों में बाहरी लोगों की बसावट बढ़ी है और कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना तेजी से बदली है।
कई स्थानों पर भूमि अतिक्रमण और अवैध निर्माण से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।
इन आरोपों की पुष्टि और वास्तविक स्थिति की जांच प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है।
