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    November 25, 2025

    धार्मिक स्थलों पर झंडा फहराने को लेकर सियासत तेज, विपक्ष ने PM से जवाब मांगा

    अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊंचे शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भगवा धर्म ध्वज फहराए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत का संविधान किसी एक धर्म को नहीं मानता, फिर प्रधानमंत्री मंदिर पर ध्वज क्यों फहरा रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
    अल्वी ने पूछा— “क्या प्रधानमंत्री किसी मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च पर भी ऐसा ध्वज फहराएंगे? उन्हें नेहरू से सेक्युलरिज्म सीखना चाहिए।”

    ‘भारत और दुनिया राम–मय है’ — पीएम मोदी

    ध्वज स्थापना कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए। इसे मंदिर निर्माण पूर्ण होने का प्रतीक बताया गया।
    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और दुनिया आज “राम–मय” है। उन्होंने इसे सदियों पुराने घाव भरने वाला और 500 साल पुराने संकल्प की पूर्ति का क्षण बताया।
    पीएम ने कहा — “धर्म ध्वज केवल एक झंडा नहीं, राम की ऊर्जा का प्रतीक है। हर राम भक्त के मन में आज अद्भुत संतोष और कृतज्ञता है।”

    कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र का जवाब

    केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का कदम पूरी तरह संवैधानिक है।
    उन्होंने कहा —
    “प्रधानमंत्री मोदी सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं। राम मंदिर पर ध्वज फहराना किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि एक तरह से सेक्युलरिज्म का ही प्रतीक है। कांग्रेस ने हमेशा हिंदू वोटों की राजनीति की है।”

    AIMIM ने भी उठाए तीखे सवाल

    AIMIM नेता वारिस पठान ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा —
    “6 दिसंबर 1992 भारत के लोकतंत्र के लिए काला दिन था जब बाबरी मस्जिद गिराई गई। हमारा मानना है कि मस्जिद वहीं रहेगी जहां थी। प्रधानमंत्री पूरा देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, किसी एक समुदाय का नहीं। वहां जाकर झंडा फहराना सवाल खड़े करता है।”

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