यूनिसेफ की नई रिपोर्ट स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2025 के अनुसार, भारत ने पिछले दशक में गरीबी कम करने में दुनिया में सबसे तेज प्रगति की है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि वयस्कों की खुशहाली का लाभ बच्चों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया। देश में अभी भी 20.6 करोड़ बच्चे कम से कम एक बुनियादी सेवा—जैसे आवास, स्वच्छता, पानी, पोषण, स्वास्थ्य या शिक्षा—से वंचित हैं।
रिपोर्ट बताती है कि इनमें से 6.2 करोड़ बच्चे दो या उससे अधिक वंचनाओं का सामना कर रहे हैं, जो उनकी सीखने की क्षमता, स्वास्थ्य और भविष्य के विकास को सीधे प्रभावित करता है। दुनिया के हर पांच में से एक बच्चा भारत में रहता है, और यहां 46 करोड़ बच्चे (18 वर्ष से कम आयु वाले) हैं।
24.8 करोड़ नागरिक बहुआयामी गरीबी से बाहर आए: नीति आयोग
राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, भारत ने वर्ष 2013–14 से 2022–23 के बीच 24.8 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। इसी अवधि में राष्ट्रीय एमपीआई दर 29.2% से घटकर 11.3% रह गई। रिपोर्ट इसे भारत की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानती है।
"बाल गरीबी का अंत संभव" — यूनिसेफ इंडिया
यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा कि रिपोर्ट याद दिलाती है कि उपलब्ध संसाधनों और ज्ञान के इस्तेमाल से बाल गरीबी को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में निवेश सबसे लाभकारी निवेश है और भारत ने यह साबित किया है कि प्रभावी कार्यक्रमों को तेज कर अंतिम छोर तक पहुंचा जा सकता है।
उनके अनुसार, भारत की यह प्रगति देश के विजन 2047 को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
10 साल में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में 45% वृद्धि
यूनिसेफ रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% तक पहुंच गई है, जिसे बच्चों के विकास के लिए भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया है।
हालांकि रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि—
- पोषण में सुधार हुआ है, लेकिन अल्पपोषण अब भी गंभीर चुनौती है।
- स्वच्छ पेयजल और शौचालय की पहुंच बढ़ी है,
- लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच अभी भी नहीं बन सकी है।
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