पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इसी बीच राज्य में एसआईआर (Special Summary Revision) की प्रक्रिया को लेकर राजनीति गरमा गई है। बिहार के बाद अब बंगाल में यह प्रक्रिया लागू होने पर लगातार विवाद हो रहा है। इसी दौरान कई आत्महत्या की घटनाएँ सामने आईं, जिन पर टीएमसी ने आरोप लगाया है कि “एसआईआर के डर और चुनाव आयोग के दबाव के कारण लोग जान दे रहे हैं।”
टीएमसी ने दावा किया कि एक बीएलओ (BLO) ने भी दबाव में आकर आत्महत्या की, जिसके लिए उन्होंने सीधे चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
टीएमसी की आपत्ति, EC और BJP की मांग — प्रक्रिया पूरी हो
टीएमसी ने एसआईआर को लेकर गहरी आपत्तियाँ जताई हैं, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा का कहना है कि प्रक्रिया देशभर में एक समान रूप से चल रही है और बंगाल में भी इसे पूरा होना चाहिए। इसी विवाद के बीच टीएमसी ने चुनाव आयोग से मुलाकात का समय मांगा था।
आयोग ने पत्र भेजकर बताया कि 28 नवंबर सुबह 11 बजे टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के लिए वह तैयार है।
“बैठक लाइव हो” — अभिषेक बनर्जी की चुनौती
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यह बैठक सार्वजनिक होनी चाहिए और लाइव प्रसारित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे लोग खुद देख सकेंगे कि आयोग उनके “पांच सरल और वैध सवालों” का क्या जवाब देता है।
अभिषेक ने लिखा —
“क्या चुनाव आयोग अपनी पारदर्शिता साबित करने को तैयार है या फिर वह सिर्फ बंद कमरों में काम करना पसंद करता है?”
टीएमसी का आरोप — ‘चुनाव आयोग की पारदर्शिता सिर्फ दिखावा’
टीएमसी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुलाकात के लिए 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल समय मांग रहा है, जो जनता द्वारा चुने गए हैं।
इसके विपरीत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त सरकार द्वारा चुने जाते हैं।
टीएमसी ने कहा कि आयोग की “पारदर्शिता” की जो छवि दिखाई जा रही है, वह सिर्फ बनाई हुई है, और यदि आयोग सच में पारदर्शी है तो उसे जनप्रतिनिधियों से मिलने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
भाजपा की प्रतिक्रिया
टीएमसी के आरोपों पर बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरे देश में एक समान चल रही है, फिर ममता बनर्जी बंगाल में इतना विरोध क्यों कर रही हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ के कार्य में मदद के लिए राज्य सरकार को एक डेटा एंट्री ऑपरेटर देना होता है, लेकिन ममता सरकार एक भी ऑपरेटर उपलब्ध नहीं करा रही है।
भट्टाचार्य ने कहा कि “सिर्फ पत्र लिखने से कुछ नहीं होगा।”
