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    January 21, 2026

    शादी के विवादों में एआई का गलत इस्तेमाल? फर्जी सबूतों पर अदालत ने जताई गंभीर चिंता

    सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में फर्जी और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से तैयार किए जा रहे सबूतों के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ते ही कई बार एक-दूसरे को “किसी भी कीमत पर सबक सिखाने” की मानसिकता हावी हो जाती है, जिसके चलते झूठे आरोप लगाए जाते हैं और तकनीक का दुरुपयोग कर नकली सबूत तक गढ़ लिए जाते हैं।

    तकनीक के दुरुपयोग से प्रभावित हो रही न्यायिक प्रक्रिया

    न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान विवाह को अपरिवर्तनीय रूप से टूट चुका मानते हुए तलाक की अनुमति दी। इस दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि मौजूदा समय में तकनीक, खासकर एआई, की मदद से झूठे साक्ष्य तैयार करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    पीठ ने कहा कि इस तरह के फर्जी सबूत न केवल व्यक्तिगत रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। अदालत ने ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने और तकनीक के दुरुपयोग को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।

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