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    September 27, 2025

    स्थायी समितियों के कार्यकाल विस्तार पर चर्चा, कार्यक्षमता बढ़ाने की कवायद

    केंद्र सरकार संसद की स्थायी समितियों का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर दो साल करने पर विचार कर रही है। सांसदों का कहना है कि मौजूदा अवधि बेहद कम है और इतने समय में चुने गए विषयों पर गहराई से अध्ययन कर ठोस रिपोर्ट तैयार करना संभव नहीं। सरकार इस पर जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से चर्चा कर फैसला ले सकती है।

    सांसदों की दलील

    कुछ सांसदों का कहना है कि एक साल में समितियों का काम अधूरा रह जाता है। यदि कार्यकाल दो साल का होगा तो समितियां विषयों पर विस्तृत अध्ययन कर ज्यादा असरदार सिफारिशें दे पाएंगी।

    कब होता है गठन?

    आमतौर पर स्थायी समितियों का गठन हर साल सितंबर-अक्तूबर में होता है। इन्हें ‘मिनी संसद’ भी कहा जाता है। इन समितियों में विभिन्न दलों के सांसदों को उनकी ताकत के अनुपात में जगह दी जाती है।

    संरचना और जिम्मेदारियां

    फिलहाल संसद में 24 विभागीय स्थायी समितियां हैं। इनमें से 8 की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य और 16 की अध्यक्षता लोकसभा सदस्य करते हैं। इनके अलावा वित्तीय व अस्थायी समितियां भी बनती हैं, जो विधेयकों और नीतियों की गहन समीक्षा करती हैं।

    आगे का रास्ता

    सरकार का मानना है कि कार्यकाल बढ़ने से समितियों की सिफारिशें ज्यादा प्रभावी होंगी और नीतियों पर गहराई से विमर्श संभव होगा। अब देखना होगा कि सांसदों की इस मांग को कब और कैसे अमल में लाया जाता है।

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