कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर एक बार फिर टकराव तेज हो गया है। सरकार के गठन के समय मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच जो सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान शुरू हुई थी, वह दोबारा खुलकर सामने आने लगी है। सियासी गलियारों में चर्चा यह है कि कांग्रेस क्या सिद्धरमैया को हटाकर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना सकती है। बताया जाता है कि सरकार गठन के समय पार्टी एक नेतृत्व साझा करने के फॉर्मूले पर सहमत हुई थी, लेकिन पार्टी की ओर से इस पर अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
दोनों नेताओं के समर्थक खुलकर अपनी-अपनी मांगें रख रहे हैं, जिससे पार्टी आलाकमान पर दबाव बढ़ गया है। सिद्धरमैया ने हाल ही में 20 नवंबर को मुख्यमंत्री के तौर पर ढाई साल पूरे किए हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की पैरवी करने के लिए कम से कम 15 विधायक और करीब एक दर्जन विधान परिषद सदस्य दिल्ली में मौजूद हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बैठक की कोशिश में हैं।
कांग्रेस ने दो साल पहले कर्नाटक विधानसभा की 224 में से 135 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी। लेकिन सत्ता में आने के तुरंत बाद से ही सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच पद को लेकर संघर्ष शुरू हो गया था। उस समय पार्टी आलाकमान ने स्थिति को संभाल लिया था, लेकिन यह विवाद एक बार फिर उभर आया है। बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आलाकमान ने विधायकों व नेताओं को नेतृत्व से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से रोकने की सख्त चेतावनी जारी की है।
इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने साफ कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे और नेतृत्व परिवर्तन, मंत्रिमंडल फेरबदल या सरकार के पुनर्गठन संबंधी फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि नेतृत्व का निर्णय शीर्ष स्तर पर ही होगा और वह उसे स्वीकार करेंगे। सिद्धरमैया समर्थक इस बयान को उनकी दृढ़ स्थिति के रूप में देख रहे हैं।
वहीं, शिवकुमार भी सार्वजनिक टकराव से बचते दिख रहे हैं। उन्होंने सिद्धरमैया के ढाई साल पूरे करने पर बधाई दी और कहा कि “हम सब मिलकर काम करेंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी हाईकमान पर छोड़ दी है और नेतृत्व परिवर्तन पर निर्णय अब पार्टी शीर्ष नेतृत्व का होगा। दिल्ली में कई विधायकों के जुटने को लेकर डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा कि नेताओं को अपने उच्च नेतृत्व से मिलने का अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता।
फिलहाल स्थितियां संकेत दे रही हैं कि कांग्रेस अगले कुछ हफ्तों तक कर्नाटक में आंतरिक राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के प्रयास में जुटी रहेगी। नेतृत्व परिवर्तन होना है या नहीं — इसका निर्णय हाईकमान स्तर पर ही होगा, पर यह स्पष्ट है कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर शक्ति संघर्ष पूरी तरह थमा नहीं है।
