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    October 25, 2025

    सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई, हाईकोर्ट के निर्णय पर एमपी सरकार की अपील पर जताई चिंता

    भूमि विवाद के एक मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पौने पांच साल की देरी से दायर अपील को स्वीकार करने के हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

    सुप्रीम कोर्ट का रुख:
    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अपील दायर करने में चार वर्ष नौ महीने की देरी को माफ करना हाईकोर्ट की विवेकहीनता को दर्शाता है। याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत पाराशर ने कहा कि हाईकोर्ट ने कानून के स्थापित सिद्धांतों की अनदेखी की है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि राज्य को देरी माफ करने में कोई विशेष छूट नहीं दी जा सकती।

    पाराशर ने कहा कि सरकार ने अपील दाखिल करने में घोर लापरवाही दिखाई और केवल सरकारी प्रक्रिया में देरी का हवाला पर्याप्त कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने शंकरगिर की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

    भूमि का इतिहास:
    शंकरगिर ने 2002 में रतलाम जिले में 3.870 हेक्टेयर कृषियोग्य भूमि नीलामी के माध्यम से खरीदी थी। 2010 में तहसीलदार ने आदेश दिया कि यह भूमि मठ नव दुर्गा मंदिर की संपत्ति है। शंकरगिर ने इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी। रतलाम जिला अदालत ने 25 नवंबर 2019 को तहसीलदार का आदेश रद्द कर दिया और शंकरगिर को इस भूमि का वैध मालिक और कब्जाधारी घोषित किया।

    राज्य सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ लगभग चार वर्ष नौ माह की देरी के बाद 2024 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

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