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    October 28, 2025

    सुप्रीम कोर्ट ने छात्र की याचिका खारिज की, केस रद्द करने से किया इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने एक कानून के छात्र मोहम्मद फैयाज मंसूरी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। मंसूरी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर लिखा था कि बाबरी मस्जिद एक दिन फिर से बनाई जाएगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की पीठ ने कहा कि उन्होंने पोस्ट देखी है और वे इस मामले में दखल नहीं देना चाहते।

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तल्हा अब्दुल रहमान ने दलील दी कि पोस्ट में कोई अश्लीलता या भड़काऊ भाषा नहीं थी। उन्होंने कहा कि मंसूरी ने सिर्फ इतना कहा था कि बाबरी मस्जिद उसी तरह बनेगी जैसे तुर्की में एक मस्जिद को फिर से बनाया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि भड़काऊ टिप्पणी किसी अन्य व्यक्ति ने की थी, जिसकी जांच नहीं की गई।

    इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, हमसे कोई कठोर टिप्पणी न कराईए। अदालत के रुख को देखते हुए अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    पीठ ने आदेश में कहा, कुछ समय तक बहस होने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए जाने वाले सभी बचाव संबंधी तर्क ट्रायल कोर्ट में अपने गुण-दोष के आधार पर विचार किए जाएंगे। मंसूरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार किया गया था।

    अगस्त 2020 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस पोस्ट में एक अन्य व्यक्ति ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद लखीमपुर खीरी के जिला मजिस्ट्रेट ने मंसूरी की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। हालांकि बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वह गिरफ्तारी आदेश रद्द कर दिया। इस साल की शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लिया। इसके खिलाफ मंसूरी ने फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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