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    October 21, 2025

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पत्नी की आर्थिक स्वतंत्रता और रोजमर्रा की जरूरतों पर रोक अस्वीकार्य

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पति को अपनी अलग रह रही पत्नी का सारा सामान 24 घंटे के भीतर लौटाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने टिप्पणी की कि यह घृणित और बेहद शर्मनाक है कि पति ने 2022 से पत्नी को अपने कपड़े और निजी सामान तक लेने की अनुमति नहीं दी।

    पति की याचिका और अदालत का आदेश

    मामला उस समय उभरा जब पति ने अदालत से गुहार लगाई कि उसका नाबालिग बेटा दिवाली के दिन घर आकर परिवार के साथ पूजा कर सके। पत्नी ने इस मांग का कड़ा विरोध किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि बेटा मां और पिता दोनों के साथ पास के मंदिर में पूजा कर सकता है, और यदि दादा-दादी चाहें तो वे भी शामिल हो सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिश्तों में दरार के बावजूद न्यूनतम मानवीय मर्यादा बनाए रखना अनिवार्य है।

    सख्त टिप्पणी

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादियां टूट सकती हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कोई पति अपनी पत्नी को उसके जरूरी कपड़े और निजी सामान लेने से रोके। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह 24 घंटे के भीतर पत्नी का सारा सामान लौटाए।

    पति-पत्नी के बीच विवाद की पृष्ठभूमि

    रिकॉर्ड के अनुसार, दंपती ने 2016 में विवाह किया था। कुछ वर्षों बाद संबंधों में तनाव बढ़ा और 2022 में महिला अपने बेटे के साथ घर छोड़कर अलग रहने लगी। पति एक बीमा कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि पत्नी बैंक में नौकरी करती हैं। वैवाहिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है, जिसमें बच्चा सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

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