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    June 02, 2026

    सिक्सर किंग वैभव सूर्यवंशी बने केस स्टडी, IIM इंदौर करेगा मानसिकता और नेतृत्व क्षमता का अध्ययन

    वैभव सूर्यवंशी की सफलता पर IIM इंदौर करेगा स्टडी, 15 साल की उम्र में ‘सिक्सर किंग’ बनने का फॉर्मूला खोजेगा

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को अपनी केस स्टडी में शामिल करने जा रहा है। ‘वैभव मॉडल’ पर आधारित यह देश की पहली मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी होगी, जिसमें खेल, मनोविज्ञान और प्रबंधन के विशेषज्ञ मिलकर कम उम्र में बड़ी सफलता हासिल करने के कारकों का अध्ययन करेंगे।

    राजस्थान रॉयल्स के ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में 72 छक्के लगाकर एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल का 14 साल पुराना 59 छक्कों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और असाधारण प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है।

    IIM इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने कहा कि यह स्टडी केवल वैभव की उपलब्धियों का विश्लेषण नहीं करेगी, बल्कि उन सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक और संस्थागत कारकों को भी समझेगी, जिन्होंने कम उम्र में उन्हें इस स्तर तक पहुंचाया।

    उन्होंने कहा कि वैभव की क्रिकेट यात्रा प्रतिभा, मेहनत, परिवार के त्याग, समर्पण और मेंटरशिप का बेहतरीन उदाहरण है। प्रतिभा जन्मजात हो सकती है, लेकिन उसे दीर्घकालिक सफलता में बदलने के लिए सही सोच, मजबूत समर्थन तंत्र और दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी होता है।

    IIM की मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा के अनुसार, यह अध्ययन भविष्य के प्रबंधकों और नीति-निर्माताओं के लिए भी उपयोगी साबित होगा। वैभव की तेज बैट स्पीड, सटीक टाइमिंग और दबाव में संतुलित खेल उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।

    वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी तकनीक को निखारा, जबकि राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा और कोच विक्रम राठौर उनकी बल्लेबाजी को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैभव महज 0.3 सेकंड में निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं, जिससे गेंदबाजों को रणनीति बनाने का समय नहीं मिल पाता।

    स्टडी में सफलता के साथ जुड़ी चुनौतियों पर भी फोकस किया जाएगा। हिमांशु रॉय ने कहा कि कम उम्र में प्रसिद्धि, करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट और सोशल मीडिया का दबाव कई प्रतिभाओं को प्रभावित करता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि युवा प्रतिभाओं को लंबे समय तक कैसे संभाला जाए और उनकी क्षमता को स्थायी सफलता में कैसे बदला जाए।

    IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने 16 पारियों में 48.50 की औसत और 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। सीजन में सर्वाधिक रन बनाने पर उन्हें ऑरेंज कैप मिली। इसके अलावा ‘सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन’ और ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ समेत कुल पांच अवॉर्ड भी अपने नाम किए।

    IIM इंदौर का मानना है कि इस अध्ययन से न केवल खेल जगत, बल्कि कॉरपोरेट सेक्टर को भी टैलेंट मैनेजमेंट और नेतृत्व विकास का नया मॉडल मिल सकता है।

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