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    May 25, 2026

    स्कूलों में सुविधाओं की कमी पर SC चिंतित, कहा- छात्राओं की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन और लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार को 30 जनवरी के फैसले को पूरी तरह लागू कराने का निर्देश देते हुए कहा कि वह हर तीन महीने में इस मामले की निगरानी करेगी।

    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि यह फैसला देश की महिलाओं और छात्राओं के हित में है और इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा लड़कियों तक पहुंचना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

    केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को बताया कि 30 जनवरी के फैसले के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। अदालत ने पूछा कि क्या राज्यों से नियमित डेटा जुटाया जा रहा है। इस पर केंद्र ने बताया कि पिछले दो से ढाई महीने का डेटा एकत्र किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को 15 अगस्त तक अपनी स्थिति रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य की ओर से रिपोर्ट देने में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। शिक्षा मंत्रालय को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल मंत्रालय बनाया गया है।

    30 जनवरी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सरकारी और निजी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने और लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट व पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

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