• Home
  • India
  • Rajasthan
  • Alwar
  • Politics
  • SPORTS
  • ECONOMY
  • Science & Tech
  • Jobs
  • HEALTH
  • Bollywood
  • blog
    May 29, 2026

    पूर्व CJI बोले- अदालत की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है, कॉकरोच विवाद पर दी सफाई

    ‘कॉकरोच’ विवाद पर पूर्व CJI बीआर गवई बोले- जज भी इंसान हैं, शब्दों को गलत तरीके से पेश किया जाता है

    भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट में बेरोजगारों के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्दों पर उठे विवाद को लेकर कहा है कि इस मुद्दे को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जज भी इंसान होते हैं और सुनवाई के दौरान बिना किसी बुरे इरादे के कभी-कभी कोई शब्द निकल जाता है, जिसे बाद में संदर्भ से हटाकर विवाद का रूप दे दिया जाता है।

    दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में बीआर गवई ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी टिप्पणी का पूरा संदर्भ समझे बिना उसका अलग अर्थ निकाल लिया जाता है। इससे अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों को स्वीकार करना होगा।

    न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के सवाल पर पूर्व CJI ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी संस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में न्यायपालिका में ऐसे मामलों की संख्या कम है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लगातार सुधार की दिशा में काम करती रहती है और उसका उद्देश्य जनता का विश्वास बनाए रखना है।

    रिटायरमेंट के बाद जजों के सरकारी या राजनीतिक पद स्वीकार करने के मुद्दे पर गवई ने कहा कि यह व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन उनका मानना है कि यदि किसी जज को भविष्य में किसी पद की उम्मीद न हो तो वह पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ काम कर सकता है। उन्होंने बताया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज बनने के समय ही उन्होंने तय कर लिया था कि सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे।

    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात पर हुई आलोचना के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका पालन-पोषण धर्मनिरपेक्ष वातावरण में हुआ है और वे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा तथा दरगाह सभी जगह जाते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और उपासना की स्वतंत्रता देता है।

    बीआर गवई 14 मई 2025 से 23 नवंबर 2025 तक देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश रहे थे। सेवानिवृत्ति के बाद अब वे अपने निजी शौक, जैसे टेनिस और तैराकी, के लिए समय निकाल रहे हैं।

    Tags :
    Share :

    Top Stories