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    November 07, 2025

    पूर्व CIA अधिकारी का दावा: पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम भारत विरोधी था, A.Q. खान ने बनाया ‘इस्लामी बम’ CIA खुलासा: सऊदी अरब के समर्थन

    पाकिस्तान के परमाणु हथियार विकसित करने का मुख्य उद्देश्य शुरू में भारत का मुकाबला करना था। लेकिन इसके निर्माता और प्रसारक अब्दुल कादिर खान के नेतृत्व में यह उद्देश्य बदल गया और इसे एक “इस्लामी बम” का रूप दे दिया गया। इसका मकसद ईरान समेत अन्य इस्लामी देशों तक इस तकनीक को पहुंचाना और उसका विस्तार करना था। यह खुलासा अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने किया है।

    बार्लो ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि 1980 के दशक में वह पाकिस्तान की गुप्त परमाणु गतिविधियों के दौरान CIA में एक प्रसार-विरोधी अधिकारी (Non-Proliferation Officer) के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क ने 1990 के दशक की शुरुआत में ईरान को गैस सेंट्रीफ्यूज तकनीक और संभवतः परमाणु हथियारों की योजनाएं भी दीं, जिससे तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को दशकों तक गति मिली।

    बार्लो ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम केवल भारत की क्षमताओं का रणनीतिक जवाब नहीं था — जो 1974 में परमाणु हथियार हासिल कर चुका था — बल्कि इसके पीछे व्यापक वैचारिक महत्वाकांक्षाएं भी थीं।
    उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम शुरू में भारत से मुकाबले के लिए था, लेकिन अब्दुल कादिर खान और सेना के शीर्ष जनरलों के नजरिए से यह स्पष्ट था कि यह केवल पाकिस्तानी नहीं, बल्कि ‘इस्लामी बम’ था।”


    ‘मुस्लिम बम’ का विचार भुट्टो का था

    बार्लो ने बताया कि “मुस्लिम बम” का विचार अब्दुल कादिर खान का नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का था।
    भुट्टो ने कहा था, “ईसाई बम है, यहूदी बम है और हिंदू बम है — हमें एक मुस्लिम बम की जरूरत है।”
    इसी विचार से प्रेरित होकर अब्दुल कादिर खान ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसे बाद में इस्लामी दुनिया के साझा शक्ति प्रतीक के रूप में देखा गया।

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