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    September 25, 2025

    मालेगांव केस से बरी होने के बाद सेना ने दिया प्रमोशन, लेफ्टिनेंट पुरोहित बने कर्नल

    2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बरी होने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का प्रमोशन कर उन्हें कर्नल का दर्जा दिया गया है। 31 जुलाई को विशेष एनआईए अदालत ने प्रसाद पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी किया था।

    मालेगांव ब्लास्ट की पृष्ठभूमि
    29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में रमजान के महीने में जबरदस्त धमाका हुआ था। इस विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। नवंबर 2008 में ले. कर्नल प्रसाद पुरोहित को महाराष्ट्र एटीएस ने विस्फोट की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 17 साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 31 जुलाई को उन्हें बरी कर दिया। विशेष एनआईए जज ए.के. लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय सबूत पेश करने में असफल रहा।

    प्रसाद पुरोहित पर लगे आरोप
    एटीएस ने दावा किया था कि पुरोहित ने 2006 में अभिनव भारत संगठन की स्थापना में भूमिका निभाई थी और संगठन के जरिए बम धमाकों के लिए फंड्स जुटाए गए। उन पर आरोप था कि वे इन बैठकों में अलग झंडा और संविधान बनाने की बातें करते थे और विदेश में निर्वासित सरकार बनाने का विचार फैलाते थे। फोन टैपिंग और अन्य वार्ताओं को सबूत के रूप में पेश किया गया।

    कोर्ट में बचाव
    पुरोहित ने कहा कि जिन बैठकों में उनके शामिल होने का दावा किया गया, वे सेना के खुफिया अधिकारी के रूप में कट्टरवाद के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए मौजूद थे। उन्होंने यह भी बताया कि खुफिया अधिकारी के लिए आरडीएक्स जैसी सामग्री हासिल करना असंभव था। सेना के कई अधिकारियों ने अदालत में उनके पक्ष में गवाही दी। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में उन्हें जमानत दी, जिसके बाद वे सेना के साथ फिर से जुड़ गए।

    पुरोहित का बयान
    रिहाई के बाद ले. कर्नल प्रसाद पुरोहित ने कहा, "न्यायपालिका ने केस को समझा और हम सबको न्याय दिया। इस लड़ाई में भारतीय सशस्त्र बलों ने मेरा पूरा साथ दिया। मैं उनका धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं ढूंढ पा रहा हूं।"

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