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    November 22, 2025

    मुख्य न्यायाधीश की पहल से जज चयन में मेरिट और सामाजिक न्याय दोनों को समान महत्व

    देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के लगभग छह महीने के कार्यकाल में न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम देखा गया। इस अवधि में देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में अनुसूचित जाति वर्ग से 10 और अन्य पिछड़े तथा पिछड़े वर्ग से 11 जजों की नियुक्ति की गई।

    सीजेआई गवई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यीय कॉलेजियम का नेतृत्व किया, जिसने हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए 129 नामों की सिफारिश सरकार को भेजी। इनमें से 93 नामों को मंजूरी मिली। इन नियुक्तियों में 13 अल्पसंख्यक समुदाय के जज और 15 महिला जज शामिल हैं। 49 जज बार से नियुक्त हुए, जबकि बाकी सर्विस कैडर से आए।

    अपने कार्यकाल के दौरान सीजेआई गवई ने न केवल न्यायिक भर्तियों में पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया, बल्कि कई महत्वपूर्ण फैसले भी दिए। इनमें वक्फ कानून के मुख्य प्रावधानों पर रोक, ट्रिब्यूनल सुधार कानून को रद्द करने और केंद्र की परियोजनाओं को बाद में मंजूरी देने को वैध मानने जैसे फैसले शामिल रहे। इसी अवधि में जस्टिस एनवी अंजारिया, विजय बिश्नोई, एएस चंदुरकर, आलोक अराधे और विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट के लिए पदोन्नत भी किया गया।

    शुक्रवार को सीजेआई गवई का अंतिम कार्य दिवस था। वह केजी बालकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका की कमान संभालने वाले दूसरे दलित बने। फेयरवेल समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि एक वकील और जज के रूप में 40 वर्षों के सफर के बाद वह इस संस्था को पूरी संतुष्टि और संतोष के साथ छोड़ रहे हैं।

    सीजेआई गवई 23 नवंबर को पद छोड़ देंगे। इसके बाद 24 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत भारत के अगले और 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

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