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    October 10, 2025

    केंद्र ने दी सावलकोट परियोजना को हरी झंडी, पाकिस्तान को घेरने की कूटनीतिक तैयारी तेज

    पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर लगा दिया। मोदी सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए चिनाब नदी के पानी पर रोक लगा दी। ऐसे में अब एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान पर जल प्रहार की तैयारी कर ली। सिंधु जल संधि के निलंबन के बीच केंद्र ने चिनाब नदी पर सावलकोट परियोजना को मंजूरी दी है। जिससे साफ होता है कि भारत का पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश है कि पानी को लेकर पुरानी रियायतों का दौरा खत्म हो चुका है।

    1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना
    केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की है। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के निलंबन के बाद फिर से जीवित की जा रही है। लगभग चार दशकों से रुकी हुई, सावलकोट परियोजना चिनाब बेसिन में भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है और 1960 की संधि के तहत पश्चिमी नदी जल के अपने हिस्से का पूर्ण उपयोग करने के सरकार के प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।

    इसको फिर से पहले जैसी स्थिति में लाने का काम 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से संधि को निलंबित करने की घोषणा के कुछ महीने बाद हुआ, जिससे भारत को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर स्वतंत्र रूप से बुनियादी ढांचा विकसित करने की अनुमति मिल गई थी।

    सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत तीन पूर्वी नदियां - रावी, व्यास और सतलुज भारत को उसके विशेष उपयोग के लिए आवंटित की गई थीं। जबकि तीन पश्चिमी नदियां - सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान के लिए निर्धारित थीं, हालांकि भारत के पास गैर-उपभोग्य उद्देश्यों जैसे कि रन ऑफ द रिवर जलविद्युत उत्पादन (जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग किया जाता है और बहुत कम या नगण्य जल भंडारण होता है), नौवहन और मत्स्य पालन के लिए उनके जल का उपयोग करने के सीमित अधिकार हैं।

    31,380 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से निर्मित
    राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) लिमिटेड द्वारा 31,380 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाली यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना जम्मू और कश्मीर के रामबन, रियासी और उधमपुर जिलों में फैलेगी। इसमें 192.5 मीटर ऊंचा रोलर-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट बांध और भूमिगत बिजलीघर शामिल हैं, जो सालाना लगभग 7534 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

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