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    September 23, 2025

    कोर्ट का सख्त रुख: अंसल भाइयों के 60 करोड़ से बने ट्रॉमा सेंटर्स की होगी जांच

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उपहार सिनेमा अग्निकांड पीड़ित संघ (एवीयूटी) को निर्देश दिया कि वह दिल्ली सरकार द्वारा बताए गए उन ट्रॉमा सेंटर्स का दौरा करे, जिनके निर्माण के लिए अंसल बंधुओं द्वारा जमा कराए गए 60 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। अदालत ने कहा कि अगर इन केंद्रों में किसी सुविधा की कमी पाई जाती है, तो सुधार के लिए आवश्यक आदेश दिए जा सकते हैं।

    न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने एवीयूटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता से कहा कि वे किसी प्रतिनिधि को भेजकर इन अस्पतालों की हकीकत जानें। अदालत ने टिप्पणी की कि शायद अब इस विवाद को गरिमामय तरीके से खत्म करना बेहतर होगा, ताकि बार-बार इस त्रासदी को याद कर पीड़ितों को दुखी न किया जाए।

    एवीयूटी का आरोप
    एवीयूटी की ओर से कहा गया कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिए थे, उनका पालन नहीं हुआ। उनका दावा था कि अंसल बंधुओं ने अदालत की नरमी का फायदा उठाया और सजा से बच निकले। मेहता ने कहा कि ऐसा लगता है कि 60 करोड़ रुपये काले गड्ढे में चले गए। उनका कहना था कि दिल्ली विद्युत बोर्ड को 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश भी पूरा नहीं हुआ।

    दिल्ली सरकार की दलील
    अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक डेव ने अदालत को बताया कि अंसल बंधुओं ने 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया था और इनका इस्तेमाल तीन सरकारी अस्पतालों संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल (मंगोलपुरी), सत्यवादी राजा हरिश चंदर हॉस्पिटल (नरेला) और सिरसपुर हॉस्पिटल में ट्रॉमा सेंटर्स बनाने में हुआ।

    लागत पर अदालत की टिप्पणी
    न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि 60 करोड़ रुपये, दिल्ली में किसी अस्पताल को बनाने और चलाने की लागत की तुलना में मूंगफली जैसे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त धनराशि लगाकर इन अस्पतालों को पूरी तरह चालू किया है। अदालत ने मेहता से कहा कि वह यह देखें कि ट्रॉमा सेंटर्स में आपातकालीन सेवाएं, एंबुलेंस और अन्य जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।

    सरकार की स्थिति
    दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि इन अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर्स बनाए गए क्योंकि इन इलाकों की आबादी अधिक है और जरूरत ज्यादा थी। जबकि पहले अदालत ने द्वारका में ट्रॉमा सेंटर बनाने का निर्देश दिया था, उस समय वहां कोई सरकारी अस्पताल मौजूद नहीं था। बाद में मई 2021 से द्वारका का इंदिरा गांधी अस्पताल भी शुरू हो गया, जिसमें 1,241 बेड हैं, जिनमें से 330 आईसीयू बेड हैं।

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