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    November 30, 2025

    कर्नाटक राजनीति में उथल-पुथल: अंदरूनी खींचतान ने दोहराए पुराने हालात

    कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी पिछले कई दिनों से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राजनीतिक संकट का सामना कर रही थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। शनिवार को दोनों नेताओं की नाश्ते पर बैठक हुई और मुलाकात के बाद दोनों ने कहा कि वे पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे, जिससे कयासों पर फिलहाल विराम लग गया।

    हालांकि राज्य की राजनीति में यह स्थिति नई नहीं है। 2007 में भी ऐसा ही सत्ता हस्तांतरण विवाद सामने आया था।

    क्या हुआ था 2006–07 में?

    • 2004 के चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और जेडीएस किंगमेकर बनी।
    • पहले जेडीएस ने कांग्रेस के साथ सरकार बनाई, लेकिन 2006 में गठबंधन टूट गया।
    • इसके बाद जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया।
    • दोनों दलों में समझौता हुआ कि 20–20 महीने दोनों पार्टी बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाएंगी।
    • पहले 20 महीने कुमारस्वामी सीएम रहे, लेकिन 2007 में सत्ता हस्तांतरण का समय आने पर उन्होंने सीट छोड़ने में आनाकानी की।
    • नतीजतन जेडीएस-बीजेपी गठबंधन टूट गया और राज्य में कुछ समय के लिए राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा।
    • नवंबर 2007 में बीएस येदियुरप्पा सीएम बने, हालांकि यह कार्यकाल बहुत छोटा रहा।
    • 2008 में नए चुनाव हुए और बीजेपी बहुमत के साथ सत्ता में आई।

    क्या 2007 की कहानी दोहराई जा रही है?

    मौजूदा हालात भी कहीं न कहीं 2007 जैसी खींचतान की याद दिलाते हैं।

    • तब भी सत्ता हस्तांतरण को लेकर विवाद बढ़ा था,
    • केंद्रीय नेतृत्व देर से सक्रिय हुआ था,
    • और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती चली गई थी।

    कांग्रेस आलाकमान की कोशिश है कि इस बार परिस्थितियाँ हाथ से न निकलें।
    उधर, डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, और समुदाय में उनकी अनदेखी को लेकर नाराजगी बढ़ती दिख रही है। आशंका है कि यह नाराजगी कांग्रेस के वोट-बेस पर असर डाल सकती है।

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