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    September 25, 2025

    जिला जज भर्ती में अनुभव की पात्रता पर सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस अहम सवाल पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें यह तय होना है कि क्या ऐसे न्यायिक अधिकारी, जिन्होंने बेंच जॉइन करने से पहले सात साल तक वकालत की हो, उन्हें बार कोटे के तहत जिला जज नियुक्त किया जा सकता है। अदालत का फैसला पूरे देश की न्यायिक भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

    मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 30 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की। पीठ में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, अरविंद कुमार, एस.सी. शर्मा और के. विनोद चंद्रन शामिल रहे। यह पीठ संविधान के अनुच्छेद 233 की व्याख्या कर रही है, जो जिला जजों की नियुक्ति से जुड़ा है।

    अनुच्छेद 233 क्या कहता है
    संविधान का अनुच्छेद 233 स्पष्ट करता है कि जिला जज की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा हाईकोर्ट से परामर्श के बाद की जाती है। इसमें प्रावधान है कि जो व्यक्ति केंद्र या राज्य की सेवा में नहीं है, वह तभी जिला जज बनने के योग्य होगा जब उसके पास अधिवक्ता या वकील के रूप में कम से कम सात साल का अनुभव हो और हाईकोर्ट उसकी अनुशंसा करे।

    बार और सेवा अनुभव पर विवाद
    सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि क्या वकालत और उसके बाद की न्यायिक सेवा को जोड़कर सात साल की पात्रता अवधि पूरी मानी जा सकती है। सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने कहा कि सावधानी बरतनी होगी, ताकि दो साल की प्रैक्टिस करने वाला भी पात्र न मान लिया जाए। यह विवाद जिला जज और अतिरिक्त जिला जजों की सीधी भर्ती से जुड़ा है।

    मामले की पृष्ठभूमि
    यह मुद्दा पहले तीन जजों की बेंच से पांच सदस्यीय संविधान पीठ को रेफर किया गया था। विवाद एक केरल हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ा है, जिसमें एक जिला जज की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था क्योंकि वह नियुक्ति के समय न्यायिक सेवा में था, अधिवक्ता नहीं। हालांकि याचिकाकर्ता का कहना था कि आवेदन के समय उसके पास बार में सात साल का अनुभव था।

    भर्ती प्रक्रिया पर संभावित असर
    अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि निचली न्यायिक सेवा में कार्यरत अधिकारी भी बार कोटे के तहत जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकते हैं या नहीं। यदि कोर्ट इसकी अनुमति देता है तो देशभर में न्यायिक भर्ती की मौजूदा व्यवस्था बदल जाएगी। यह मामला अहम है क्योंकि एडीजे पद पर भर्ती दो माध्यमों—प्रमोशन और अधिवक्ताओं की सीधी भर्ती—से होती है।

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