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    February 17, 2026

    बड़ी राहत: पार्थ पवार मामले में दोषमुक्त, अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

    पुणे के बहुचर्चित जमीन खरीद मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) नेता पार्थ पवार को बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पार्थ पवार की सीधी अनियमितता साबित नहीं होने की बात कही है। हालांकि जमीन सौदे की प्रक्रिया में शामिल दो सरकारी अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक हवेली के तहसीलदार सूर्यकांत येवले और असिस्टेंट रजिस्ट्रार रविंद्र तारू पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    यह मामला पुणे के मुंढवा क्षेत्र की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे पार्थ पवार की कंपनी ‘अमेडिया’ ने खरीदा था। आरोप था कि करीब 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया और करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी माफ कर दी गई। विवाद बढ़ने पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सौदा रद्द करने की घोषणा की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने विस्तृत जांच के आदेश दिए।

    जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे पार्थ पवार के लिए बड़ी राहत बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि मामले में अभी कई सवाल बाकी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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