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    September 28, 2025

    बुजुर्ग महिला को सुप्रीम राहत, SC ने इलाहाबाद HC के फैसले की आलोचना

    सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक पुराने और अहम मामले में 71 साल की बुजुर्ग महिला को राहत दी। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें महिला की अग्रिम जमानत याचिका बिना सही वजह ठुकरा दी गई थी।

    कोर्ट ने शिकायतकर्ता वकील दादूराम शुक्ला के खिलाफ 10,000 रुपये का जमानती वॉरंट जारी किया, ताकि उनकी अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित हो और उन्हें नोटिस दिया जा सके कि क्यों जुर्माना न लगाया जाए।

    बुजुर्ग महिला पर 1971 के जमीन के एक कागज में जालसाजी का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि वे वारंट जारी करें और महिला की गिरफ्तारी को रोका जाए। अदालत ने पुलिस के मामले दर्ज करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आलोचना का केंद्र

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह गलत है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 71 साल की महिला को बिना उचित वजह जमानत नहीं दी, जबकि वह जमीन के विक्रेता, खरीदार, गवाह या लाभार्थी नहीं थीं। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को लापरवाही भरा बताया और कहा कि इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    मामले की अगली सुनवाई:

    महिला ने 26 मई 2025 को अपनी बात पुलिस के सामने रिकॉर्ड कराई थी। गोंडा जिले के कोतवाली नगर थाने में 22 जून 2023 को धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वकील नोटिस लेने से बचते हैं तो उन्हें गैर-जमानती वारंट के जरिए अदालत में लाया जाए। अगली सुनवाई 8 अक्तूबर को होगी।

    एफआईआर में बताया गया है कि 20 अगस्त 1971 को एक फर्जी जमीन का कागज बनाया गया था, जिसे 7 सितंबर 2020 को रद्द कर दिया गया। महिला, मुख्य आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी की सास हैं, जो कथित तौर पर कई फर्जी कागज बनाने में शामिल रहा है।

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