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    September 20, 2025

    भारत को बड़ा नुकसान: चाबहार पर अमेरिकी रोक से अटक सकती हैं कनेक्टिविटी योजनाएं

    अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंधों से मिली छूट 29 सितंबर से खत्म करने का फैसला किया है। यह कदम भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    भारत इस बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विकास पर अब तक 85 मिलियन डॉलर (749 करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है, जबकि 120 मिलियन डॉलर (1057 करोड़ रुपये) की योजनाएं पाइपलाइन में हैं। चाबहार को यूरोप, रूस, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया तक सीधी पहुंच के कारण चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के जवाब के तौर पर देखा जाता रहा है।

    छूट खत्म होने के बाद भारतीय संचालकों पर अमेरिकी जुर्माने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश, उपकरण सप्लाई, रेल परियोजनाओं और वित्तीय लेन-देन पर असर पड़ेगा। शिपिंग और फाइनेंस की लागत बढ़ने से भारतीय कंपनियों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

    भारत ने 2018 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के जरिए शाहिद बेहेस्ती टर्मिनल का संचालन संभाला था। इसके बाद से चाबहार पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया के लिए व्यापार और मानवीय सहायता का अहम मार्ग बना। मई 2024 में भारत ने इस पोर्ट को 10 साल तक ऑपरेट करने के लिए समझौता भी किया था।

    चाबहार का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में यहां से 80 लाख टन से ज्यादा माल का परिवहन हुआ है। 2026 तक इसे ईरान के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने और क्षमता को पांच लाख टीईयू तक बढ़ाने की योजना है। होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक स्थित होने के कारण यह बंदरगाह क्षेत्रीय स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाता है।

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