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    May 22, 2026

    दिल चाहता है मना करना, फिर भी निकलता है हां,समझें इसका कारण

     

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग दूसरों को खुश रखने के लिए अपनी जरूरतों और मानसिक शांति को नजरअंदाज कर देते हैं। हर बात पर ‘हां’ कहना धीरे-धीरे मानसिक थकान, गिल्ट और तनाव की वजह बन सकता है। ऐसी ही समस्या से जूझ रही एक 34 वर्षीय महिला टीचर ने एक्सपर्ट से सवाल किया कि वह किसी को ‘ना’ नहीं कह पातीं और लोग इसका फायदा उठाते हैं।

    मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. द्रोण शर्मा के अनुसार, हर समय दूसरों को खुश रखने की कोशिश करना केवल अच्छाई नहीं, बल्कि कई बार डर, गिल्ट और अप्रूवल पाने की चाह से जुड़ा होता है। ऐसे लोग अक्सर सोचते हैं कि अगर उन्होंने मना किया तो लोग बुरा मान जाएंगे या उन्हें स्वार्थी समझेंगे।

    एक्सपर्ट के मुताबिक लगातार बिना मन के “हां” कहते रहने से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से थकने लगता है। चिड़चिड़ापन, तनाव और खुद पर गुस्सा आने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि “ना” कहना गलत नहीं, बल्कि इमोशनल हेल्थ के लिए जरूरी है।

    डॉ. शर्मा ने सलाह दी कि सबसे पहले व्यक्ति को अपनी आदत और भावनाओं को समझना चाहिए। तुरंत जवाब देने की बजाय “मैं सोचकर बताऊंगी” या “मुझे थोड़ा समय चाहिए” जैसे जवाब देने की आदत डालनी चाहिए। इससे बिना सोचे-समझे “हां” कहने की आदत कम हो सकती है।

    एक्सपर्ट ने छोटे-छोटे मामलों में “ना” बोलने की प्रैक्टिस करने और अपनी सीमाएं तय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर समय उपलब्ध रहना जरूरी नहीं है और अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।

    मेंटल हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रिश्तों की शुरुआत स्पष्ट बाउंड्री तय करने से होती है। “ना” कहना स्वार्थ नहीं, बल्कि सेल्फ रिस्पेक्ट का हिस्सा है।

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