भारत में विटामिन D की कमी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। एक अध्ययन के अनुसार देश में करीब 45 प्रतिशत से अधिक लोग विटामिन D की कमी से प्रभावित हैं। अब एक नई स्टडी में पाया गया है कि पुरुषों में यदि विटामिन D का स्तर कम हो, तो उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा और उसकी आक्रामकता दोनों काफी बढ़ जाते हैं।
शिकागो क्षेत्र के शोधकर्ताओं ने लगभग 700 पुरुषों पर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि जिन पुरुषों के शरीर में विटामिन D का स्तर कम था, उनमें ‘हाई-ग्रेड’ या एडवांस्ड प्रोस्टेट ट्यूमर विकसित होने की संभावना अधिक थी। यह पैटर्न यूरोपीय-अमेरिकी और अफ्रीकी-अमेरिकी दोनों समूहों में देखा गया। हालांकि, अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुषों में खतरा और भी ज्यादा पाया गया, जहां कैंसर न केवल अधिक आक्रामक था बल्कि इसकी आशंका भी अधिक थी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वस्थ विटामिन D स्तर बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य और संभावित रूप से कैंसर की रोकथाम के लिए आवश्यक है।
विटामिन D की कमी और कैंसर का संबंध
स्टडी के अनुसार किसी व्यक्ति की त्वचा का रंग भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है। गहरे रंग की त्वचा सूर्य से कम अल्ट्रावायलेट किरणें सोख पाती है, जिससे शरीर में विटामिन D बनने की क्षमता कम हो जाती है।
विटामिन D और कैल्शियम मिलकर प्रोस्टेट कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं और उन्हें स्वस्थ बनाए रखते हैं। इसलिए इसकी कमी से कैंसर कोशिकाओं का खतरा बढ़ सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण
चूंकि विटामिन D की कमी से कैंसर और अधिक आक्रामक हो सकता है, इसलिए पुरुषों को उसके शुरुआती संकेतों को समझना महत्वपूर्ण है। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
- पेशाब करने में कठिनाई
- पेशाब का बहाव धीमा होना
- पेशाब या वीर्य में खून
- कूल्हे या हड्डियों में लगातार दर्द
विशेषज्ञों के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
विटामिन D बढ़ाने के आसान तरीके
विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन D एक तरह का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है और इसे बढ़ाना मुश्किल नहीं है।
डाइट में शामिल करें:
- सैल्मन जैसी मछली
- अंडे की जर्दी
- मशरूम
- विटामिन D युक्त डेयरी उत्पाद
सबसे बड़ा स्रोत सूर्य का प्रकाश है। UV किरणें त्वचा पर पड़ते ही शरीर विटामिन D बनाना शुरू कर देता है।
