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    December 16, 2025

    कमजोर रुपये का फायदा: निर्यात बढ़ने से 25 अरब डॉलर तक सीमित रह सकता है व्यापार घाटा

    नुवामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का व्यापार घाटा निकट से मध्यम अवधि में नवंबर के मौजूदा स्तरों के आसपास ही बना रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रुपये की कमजोरी निर्यात और आयात के बीच के अंतर को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक देश के कुल निर्यात प्रदर्शन में नरमी देखने को मिली है। वैश्विक व्यापार में जारी सुस्ती आने वाले महीनों में भारतीय निर्यात पर और दबाव डाल सकती है। ऐसे में भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े घटनाक्रम काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनका सीधा असर आगे की निर्यात दिशा पर पड़ सकता है।

    कमजोर रुपये से कैसे मिलेगा फायदा
    रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही फिलहाल निर्यात की रफ्तार सुस्त है, लेकिन रुपये के कमजोर होने से भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते हो जाते हैं। इससे समय के साथ निर्यात को सहारा मिलने की संभावना है। वहीं आयात महंगा होने से उसमें भी कुछ हद तक कमी आ सकती है। इन दोनों कारणों से निकट से मध्यम अवधि में व्यापार घाटा नियंत्रण में रहने की उम्मीद जताई गई है।

    नुवामा का कहना है कि निर्यात भले ही धीमी गति से बढ़े, लेकिन घरेलू मांग कमजोर रहने की वजह से आयात भी सीमित रह सकता है। इससे व्यापार घाटे के बहुत ज्यादा बढ़ने का खतरा कम दिखाई देता है।

    नवंबर में व्यापार घाटे में सुधार
    नवंबर के व्यापार आंकड़ों में वस्तु व्यापार घाटे में तेज सुधार दर्ज किया गया। यह घटकर 25 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले महीने की तुलना में करीब 17 अरब डॉलर कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने के आयात में आई भारी गिरावट रही। अक्तूबर में जहां सोने का आयात 15 अरब डॉलर था, वहीं नवंबर में यह घटकर सिर्फ 4 अरब डॉलर रह गया।

    तेल और सोने को छोड़कर कोर ट्रेड डेफिसिट भी 4 अरब डॉलर घटकर 10 अरब डॉलर पर आ गया। नवंबर में माल निर्यात में भी मजबूत उछाल देखने को मिला और यह साल-दर-साल आधार पर 19 फीसदी बढ़ा, जबकि अक्तूबर में इसमें 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

    दूसरी ओर, मर्चेंडाइज आयात की वृद्धि दर नवंबर में घटकर 2 फीसदी रह गई, जो अक्तूबर में 17 फीसदी थी। हालांकि तीन महीने के मूविंग एवरेज के आधार पर आयात में 11 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। कोर आयात 12 फीसदी बढ़े, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स और मशीनरी सेक्टर में मजबूत मांग को दर्शाता है।

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