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    May 30, 2026

    वाहन सुविधा को लेकर अधिनियम का प्रावधान सामने, अन्य पदाधिकारी नहीं हैं पात्र

    नगर निगम में नियमों की अनदेखी का आरोप: अपात्र अधिकारियों को भी गाड़ियां, कलेक्टर से जांच की मांग

    राज्य सरकार जहां पेट्रोल-डीजल की बचत पर जोर दे रही है, वहीं अलवर नगर निगम में नियमों के विपरीत अधिकारियों को गाड़ियां उपलब्ध कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि निगम में अकाउंट्स ऑफिसर और एईएन जैसे अपात्र अधिकारियों को भी वाहन दिए गए हैं, जिनका मासिक किराया करीब 30 हजार रुपए प्रति गाड़ी निगम वहन कर रहा है।

    निवर्तमान पार्षद अजय पूनिया ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि निगम में पात्र अधिकारियों से अधिक गाड़ियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताते हुए अतिरिक्त गाड़ियां हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

    शिकायत के अनुसार राजस्थान नगरपालिका अधिनियम-2009 की धारा 337 के तहत महापौर, उपमहापौर, आयुक्त, निदेशक (विधि), अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त, मुख्य अभियंता, स्वास्थ्य अधिकारी, राजस्व अधिकारी और समिति अध्यक्ष ही वाहन सुविधा के पात्र हैं। इसके बावजूद निगम में लेखा अधिकारी, अतिरिक्त राजस्व अधिकारियों और एईएन को भी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।

    वहीं नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका का कहना है कि विभिन्न अधिकारियों के पास अतिरिक्त शाखाओं का प्रभार होने के कारण उन्हें वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के पास पहले से वाहन हैं, वहां से अतिरिक्त गाड़ियां हटवाई जाएंगी।

    इधर निगम कार्यालय में एसी लगाने के नियमों की भी अनदेखी का आरोप लगा है। सरकारी नियमों के अनुसार 6600 ग्रेड पे या उससे अधिक श्रेणी के अधिकारियों को ही कार्यालय में एसी लगाने की अनुमति है, जबकि निगम में एलडीसी और अन्य शाखाओं के कमरों में भी एसी लगे होने की बात सामने आई है।

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