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    September 27, 2025

    विद्यार्थियों और बोर्ड परीक्षाओं के लिए बड़ा बदलाव, स्कूल सत्र अप्रैल में शुरू करने की कवायद

    राजस्थान सरकार सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र जुलाई के बजाय 1 अप्रैल से शुरू करने पर विचार कर रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल ने इस संबंध में एक बैठक बुलाई थी, जिसमें शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत अप्रैल से करने, शिविरा पंचांग में बदलाव और स्कूल समय-सारणी में आवश्यक समायोजन पर चर्चा की गई।

    एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के साथ प्रतिस्पर्धा में टिकाऊ बनाने के लिए किया जा रहा है। राजस्थान में निजी स्कूलों का सत्र अप्रैल से शुरू होता है, जबकि सरकारी स्कूल में मार्च में परीक्षा खत्म होने के बाद स्कूल खुलने में लंबा गैप आ जाता है। इस दौरान कई बच्चे निजी स्कूलों में दाखिला ले लेते हैं।

    सत्र जल्दी शुरू करने के फायदे

    • छात्रों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सकेगा।
    • परीक्षा समय-सारणी को CBSE बोर्ड के साथ समन्वयित किया जा सकेगा।
    • अध्यायों की पढ़ाई जल्दी शुरू होने से शैक्षणिक वर्ष में निरंतरता बनी रहेगी।

    बैठक में सुझाव दिया गया कि 15 अप्रैल से 1 मई के बीच कम‑से‑कम 20 % अध्याय पूरा किया जाए, यदि पुस्तकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही परीक्षा पेटर्न में भी कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे इंटरनल असेसमेंट्स घटाना और विषय परीक्षाओं को 15 मार्च तक समाप्त करना।

    चुनौतियां

    इस बदलाव में कई चुनौतियां भी हैं। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नई किताबों और कॉपियों की प्रिंटिंग जुलाई तक पूरी होती है। इसे पहले पूरा करने के लिए बजट की अग्रिम जरूरत होगी, जो केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत जारी किया जाता है। इसलिए राज्य सरकार को केंद्र से राशि समय पर जारी करने का अनुरोध करना होगा।

    पूर्व प्रयास और शिक्षक प्रतिक्रियाएं

    इस पहल को लेकर शिक्षक संगठनों में संशय है। आल राजस्थान स्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि पहले भी इस तरह के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफल नहीं हुए। शिक्षक प्रकाश मिश्रा ने कहा कि अधिकांश ग्रामीण छात्र जुलाई से पहले स्कूल नहीं आते, इसलिए सत्र की शुरुआत अप्रैल से करना व्यवहार में चुनौतीपूर्ण होगा।

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