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    September 26, 2025

    तीन रूपों में विराजमान हैं जोगणिया माता, पहाड़ियों से घिरे धाम में उमड़ती है श्रद्धा

    चौथे-पांचवें दिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित जोगणिया माता मंदिर में नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेवाड़ के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती तीनों रूपों में विराजमान हैं। न केवल राजस्थान, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात से भी श्रद्धालु माता की आराधना करने पहुंच रहे हैं।

    प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल

    अरावली पर्वतमाला की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से तीन ओर से घिरा यह प्राचीन मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। बरसात के मौसम में मंदिर से नीचे लगभग 300 फीट गहरे दर्रे में झरना गिरता है, जिससे आसपास का दृश्य और भी मनोहारी हो जाता है।

    मंदिर की खासियतें:

    • गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर दो विशाल सिंह की प्रतिमाएं माता की रक्षा करती प्रतीत होती हैं।
    • मंडप में प्राचीन सहस्त्र शिवलिंग मौजूद है, जो भक्तों को शिव-शक्ति का अद्भुत संगम अनुभव कराता है।

    हथकड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा

    मंदिर की सबसे विशेष परंपरा है हथकड़ी चढ़ाना। मान्यता है कि जेल या गिरफ्त से मुक्त होने की कामना पूरी होने पर भक्त गुप्त रूप से मंदिर में हथकड़ी चढ़ाते हैं। दीवारों और कोनों में लटकी हुईं ये हथकड़ियां माता की न्यायकारी शक्ति और भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक मानी जाती हैं।

    इतिहास और महिमा

    जोगणिया माता मंदिर का इतिहास 8वीं-9वीं शताब्दी तक जाता है। कहा जाता है कि पहले यह अन्नपूर्णा देवी का मंदिर था। हाड़ा शासक बंबावदागढ़ की कठिन परिस्थितियों में देवी ने जोगिन का रूप धारण किया और बाद में सुंदर स्त्री स्वरूप में प्रकट हुईं। इसी लीला के कारण उन्हें “जोगणिया माता” कहा जाता है।

    नवरात्रि का उत्सव

    नवरात्रि के पावन दिनों में मंदिर भक्तों से गूंज उठता है। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच “जय माता दी” के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। दीपों की ज्योति, भजन-कीर्तन और आस्था की लहर हर भक्त के हृदय को भक्ति रस से भर देती है।

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