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    February 02, 2026

    राष्ट्रपति की साली से भी भिड़ जाते थे हेम सिंह भड़ाना, बेबाक राजनीति के लिए थे मशहूर

    पूर्व कैबिनेट मंत्री हेम सिंह भड़ाना का 59 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे अलवर जिले के ऐसे पहले छात्र नेता थे, जो छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद कैबिनेट मंत्री बने। अपने बेबाक तेवर, संघर्षशील राजनीति और वादों पर अडिग रहने की पहचान के कारण वे हमेशा चर्चा में रहे।

    हेम सिंह भड़ाना ने छात्र राजनीति से ही अपनी अलग छवि बना ली थी। बाबू शोभाराम राजकीय कला कॉलेज, अलवर में पढ़ाई के दौरान वे छात्रों के हक के लिए खुलकर आवाज उठाते थे। उस समय कॉलेज की प्रिंसिपल पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की साली थीं, लेकिन हेम सिंह इससे भी नहीं डरे। वे गनमैन को हटाकर सीधे प्रिंसिपल के चैंबर में पहुंच जाते और छात्रों की मांगें पूरी होने तक डटे रहते थे।

    दो बार छात्रसंघ चुनाव हारने के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ। आखिरकार 1992 में वे छात्रसंघ अध्यक्ष बने और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत हुई।

    छात्र राजनीति के बाद उन्होंने 2005 में किशनगढ़ बास से प्रधान का चुनाव जीता। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान 2006 में वे जेल भी गए। वर्ष 2013 से 2018 के बीच वसुंधरा राजे सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे और गुर्जर समाज व सरकार के बीच संवाद में अहम भूमिका निभाई।

    सहयोगियों के अनुसार हेम सिंह भड़ाना “जुबान के पक्के” नेता थे। जो वादा करते, उसे हर हाल में निभाते थे। सरिस्का क्षेत्र में गांवों के विस्थापन के मुद्दे पर भी उन्होंने खुलकर ग्रामीणों का पक्ष रखा और वन अधिकारियों से दो टूक कहा था कि लोगों को सम्मान के साथ पुनर्वास दिया जाना चाहिए।

    लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से उनकी मुलाकात भी चर्चा में रही थी।

    हेम सिंह भड़ाना के निधन से अलवर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक बेबाक और जमीन से जुड़े नेता का अध्याय समाप्त हो गया।

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