राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण द्वारा पिछले 6 महीनों में जोधपुर में कितने दिन न्यायिक सुनवाई की, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप तनेजा की कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार व ट्रिब्यूनल अगली सुनवाई 16 सितंबर को यह रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
मामला राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें बताया गया कि राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल की जोधपुर में स्थायी पीठ के लिए अधिसूचना जारी होने के बावजूद अब तक इसके क्रियान्वयन नहीं हुआ है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिसोदिया, दीपेश बिड़ला, वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित और अधिवक्ता अनिल भंडारी ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह शेखावत, वैभव भंसाली और धनेश सारस्वत उपस्थित हुए।
चीफ जस्टिस ने 29 जनवरी को दिया था सख्त निर्देश
गत 29 जनवरी को तत्कालीन चीफ जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की खंडपीठ ने इस मामले पर अहम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 19 जुलाई 2022 के आदेश के बाद राज्य सरकार ने जोधपुर में राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण की स्थायी पीठ की अधिसूचना जारी की है, लेकिन अधिकरण आज तक कार्यरत नहीं हुआ है।
कोर्ट ने महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद से जब यह पूछा गया कि अधिकरण आज तक कार्यरत क्यों नहीं हुआ है, तो उन्होंने कहा कि इन मामलों में बड़े मुद्दे हैं जिन पर विचार किया जाना आवश्यक है, इसलिए मामले की अंतिम सुनवाई होनी चाहिए।
यह था 19 जुलाई 2022 का आदेश, तीन दिन ही सुनवाई क्यो?
गत 19 जुलाई 2022 को जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस कुलदीप माथुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जोधपुर में अधिकरण की स्थायी पीठ स्थापित करे। उस समय कोर्ट ने पाया था कि 2,655 मामले जोधपुर उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के जिलों से संबंधित थे, जबकि जयपुर से संबंधित मामले 4,364 थे। इसके बावजूद अधिकरण केवल तीन दिन प्रति माह (मंगलवार, बुधवार, गुरुवार) जोधपुर में बैठक कर रहा था।
न्यायालय ने इसे "न्याय आपके द्वार" की अवधारणा के विपरीत माना था। कोर्ट ने तत्काल निर्देश दिया था कि राज्य सरकार जोधपुर में स्थायी पीठ स्थापित करे और जब तक स्थायी पीठ नहीं बनती, हर महीने 8 दिन जोधपुर में चल पीठ की सुनवाई हो।
कागजी कार्रवाई हुई, वास्तविक कार्यान्वयन नहीं
एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने आदेश की पालना में 4 मई 2023 को जोधपुर में अधिकरण की स्थायी पीठ की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद 12 सितंबर 2023 को आदेश जारी कर जोधपुर पीठ का क्षेत्राधिकार तय किया गया। जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली और बांसवाड़ा संभाग के सभी जिलों को जोधपुर पीठ में शामिल कर सभी नई एवं पुरानी अपीलों की सुनवाई जोधपुर पीठ के समक्ष करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही गैर-न्यायिक सदस्य और स्टाफ की नियुक्ति भी कर दी गई।
लेकिन वकीलों का आरोप है कि वास्तविक रूप में जोधपुर में स्थायी पीठ कार्यरत नहीं रही। पहले की तरह चल पीठ ही काम कर रही है, जिससे मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
न्याय व्यवस्था को महानगर केंद्रित बनाने का विरोध
कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधिकरणों की पीठें न होने से न्याय व्यवस्था महानगर केंद्रित हो जाती है, जिससे आम आदमी को न्याय पाने के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है, अधिक समय लगता है और लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है। यह उनके न्याय के मौलिक अधिकार के विपरीत है।
