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    September 16, 2025

    पाली में फसलें बर्बाद, सपने अधूरे: 51% नुकसान के बाद किसान कर्ज में डूबे, शादियाँ टालीं, बच्चों की फीस तक नहीं

    इस बार अच्छी बरसात की दुआ मांगने वाले पाली जिले के किसान अब उसी बारिश को कोस रहे हैं। जिले में औसत से अधिक बारिश ने खरीफ की फसलों को बर्बाद कर दिया है। खेतों में पानी भरने से करीब 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल चौपट हो चुकी है — जो कुल बुवाई का 51.39% है। अब किसान मुआवजे के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।

    “अब बेटे की शादी कैसे करूंगा?”

    गुड़ सोनगिरा गांव के किसान कूपाराम की आंखों में आंसू हैं। उन्होंने अपने बेटे रमेश की शादी तय कर रखी थी, लेकिन भारी बारिश से फसल खराब हो गई। शादी की तारीख टालनी पड़ी। वे कहते हैं, "बेटे की शादी और घर की मरम्मत — सब इसी फसल पर टिका था। अब कुछ नहीं बचा।"

    कर्ज लेकर बुवाई, अब कर्ज में डूबे किसान

    किसानों ने फसल बोने के लिए पहले ही उधार ले रखा था। अब जब फसल से आमदनी नहीं हो रही, तो कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है। खेताराम, जो जेतपुरा गांव के रहने वाले हैं, कहते हैं — "30 बीघा में मूंग बोई थी। सब जल गया। अब कोटा में पढ़ रहे बेटे की कोचिंग फीस भरना भी मुश्किल हो गया है।"

    “छत भी नहीं मरम्मत करवा पाऊंगा”

    संडाणा गांव (सोजत) के किसान महेन्द्र सिंह बताते हैं — "दो हेक्टेयर में फसल की बुवाई की थी। बारिश से पूरी फसल तबाह हो गई। हमारा घर भी टूट-फूट गया है, सोचा था फसल से छत सही करवा लूंगा। अब वह सपना भी अधूरा रह गया।"

    सरकारी सर्वे हुआ, पर राहत नहीं

    संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) रमेशचंद्र आमेटा के मुताबिक, इस बार पाली जिले में 3.90 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई हुई थी, जिसमें से 2.045 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग ने सर्वे कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी है, लेकिन किसानों को अभी तक कोई ठोस राहत नहीं मिली।

    किसानों का दर्द, प्रदर्शन में छलका

    कलेक्ट्रेट के बाहर किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी केवल भरोसे का बोझ दिया जा रहा है। "हमें बीमा का पैसा नहीं मिला, न ही कोई मदद।"

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