• Home
  • India
  • Rajasthan
  • Alwar
  • Politics
  • SPORTS
  • ECONOMY
  • Science & Tech
  • Jobs
  • HEALTH
  • Bollywood
  • blog
    October 03, 2025

    जासूसी कैमरा मामले में टीकाराम जूली ने राष्ट्रपति को अवगत कराने के लिए समय मांगा

    राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भड़के जासूसी कैमरा विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। कांग्रेस इस मामले को छोड़ने को तैयार नहीं है। विधानसभा में धरने‑प्रदर्शन और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।

    जूली ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र की गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। उनका कहना है कि यह न केवल विपक्षी विधायकों की निजता का हनन है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने बताया कि विपक्ष के प्रतिनिधियों ने पहले ही राज्यपाल से मिलकर सभी तथ्यों से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी।

    टीकाराम जूली ने स्पष्ट किया:

    “ऐसी परिस्थितियों में लोकतंत्र की रक्षा और संविधान की मर्यादा बनाए रखने के लिए मैंने राष्ट्रपति महोदय से मिलने का अनुरोध किया है। लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्थाएं संसद और विधानसभाएं हैं। यदि इन्हीं पर संदेह और जासूसी का वातावरण बनेगा, तो यह पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। विपक्ष इस लड़ाई को जनता और लोकतंत्र के हित में अंत तक लड़ेगा।”

    क्या था जासूसी कैमरा विवाद

    मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा में अतिरिक्त CCTV / PTZ कैमरे लगाए गए हैं। विशेष रूप से विपक्षी बेंच और महिला विधायकों के आस‑पास लगाए गए कैमरों का इस्तेमाल उनके ऊपर निगरानी रखने और गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करने के लिए किया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, ये कैमरे केवल सदन की कार्यवाही के दौरान ही नहीं बल्कि उसके बाद भी सक्रिय रहते हैं, और स्पीकर के कमरे या रेस्ट रूम जैसी जगहों से भी इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

    कांग्रेस का कहना है कि यह नियमों और विधानसभा की पारंपरिक मर्यादाओं का उल्लंघन है और विधायक‑सदस्यों की निजता का हनन करता है।

    स्पीकर और सरकार का बयान

    विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि कैमरे केवल सदन की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और प्रसारण के लिए हैं, ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं होती।
    सरकार ने भी कहा कि ये कैमरे सुरक्षा कारणों, सदन के ऑडिट‑प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए हैं।

    Tags :
    Share :

    Top Stories