राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को भी जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायक ट्रैक्टर पर बैठकर विधानसभा पहुंचे और प्रदेश में अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों तथा आमजनको मुआवजा देने की मांग की। विधानसभा के बाहर करीब आधा घंटे तक का हाई वोल्टेज ड्रामा चला। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अगुवाई में कांग्रेस विधायक ट्रैक्टर पर बैठकर विधानसभा में घुसने की कोशिश करने लगे। लेकिन विधानसभा सुरक्षा गार्ड व पुलिस जाब्ते ने उन्हें रोकने के लिए बाहर बेरिकेडिंग कर दी। इसके बाद कांग्रेस विधायक पैदल ही हाथ में बैनर लेकर विधानसभा में प्रवेश कर गए। विधानसभा गेट के बाहर करीब 15 मिनट तक जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद प्रश्नकाल में भी जमकर बवाल हुआ।
पहले प्रश्नकाल में बवाल हुआ। टीकाराम जूली ने सरिस्का अभ्यारण को लेकर सरकार से सवाल पूछा था लेकिन विधानसभा ने उसे अग्राह्य कर दिया। इस पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। जूली ने कहा कि सरिस्का में जमकर अवैध खनन हो रहा है और यहां मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया जा रहा। इस मुद्दे पर सदन में एक बार फिर से उनकी वन मंत्री संजय शर्मा के साथ तनानती हो गई। शून्यकाल में कांग्रेस विधायकों ने अतिवृष्टि से आई आपदा पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लगाए। लेकिन स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव मंजूर नहीं किए। फिर भी कांग्रेस के कुछ विधायकों को 2-2 मिनट बोलने की अनुमति दी गई।
कांग्रेस का आरोप - 'हेलिकॉप्टर से हालात नहीं सुधरते':
कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया ने कहा कि सरकार सिर्फ हेलिकॉप्टर में घूम रही है, किसानों की सुध लेने कोई नहीं गया। अमित चाचाण ने कहा कि लाखों एकड़ फसल तबाह हो चुकी है, लेकिन सरकार गंभीर नहीं दिख रही। ” कांग्रेस विधायक अमित चाचाण और नरेंद्र बुडानिया ने कहा- अतिवृष्टि से हालात खाराब हैं। किसानों की पकी फसल खराब हो चुकी है। लाखों एकड़ जमीन में नुकसान हुआ है। सरकार ने इनकी सुध नहीं ली।
किरोड़ी मीणा ने दी स्थिति की जानकारी:
आपदा राहत मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने सदन में बताया कि भारी बारिश से अब तक 193 लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों मकान और पशु बर्बाद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि SDRF के नियमों के अनुसार राहत कार्य जारी हैं और गिरदावरी शुरू हो चुकी है।
